रायपुर : शिलांग के साई स्पोर्ट्स ट्रेनिंग सेंटर (एसटीसी) में बेथलाइन ग्रेस माकरी के कोचों ने अचानक किशोरी में रेस वॉकिंग के लिए एक नई चमक देखी। हैरानी की बात यह है कि बेथलाइन स्वयं इस खेल के बारे में लगभग अनजान थीं।
जनवरी 2026 में जब उन्होंने रेस वॉकिंग में स्विच किया, तो उनके लिए यह पूरी तरह नया क्षेत्र था। शुरू में उन्होंने खुद पर कई शंकाएँ पालीं, क्योंकि यह खेल उनकी पूर्व पसंद और अनुभव से बिल्कुल अलग था। लेकिन उन्होंने अपने आत्म-संदेह को पीछे छोड़कर कड़ी मेहनत और समर्पण के साथ प्रशिक्षण जारी रखा।
कोचों का कहना है कि उनकी तकनीक और गति में लगातार सुधार देखने को मिला, जो उनके प्रेरणा और दृढ़ता का परिचायक था। उन्होंने प्रशिक्षण के दौरान कई चुनौतियों का सामना किया, पर कभी हिम्मत नहीं हारी।
बेथलाइन ने KITG (कीर्ति ट्रॉफी गेम्स) में भाग लिया और अपने पहले ही बड़े प्रदर्शन में कांस्य पदक हासिल किया, जो उनके संघर्ष और लगातार प्रयासों का प्रतिफल है। यह उपलब्धि न केवल उनके लिए बल्कि पूरे शिलांग और त्रिपुरा राज्य के लिए गर्व का कारण बनी।
इस सफलता के पीछे बेथलाइन की मानसिक मजबूती और कोचों की मेहनत को भी सराहा गया। उन्होंने कहा कि खेल में बदलाव के बावजूद, उन्होंने अपने सपनों को साकार करने का पूरा संकल्प किया।
विशेषज्ञों का मानना है कि बेथलाइन माकरी जैसे युवा खिलाड़ियों में देश का भविष्य छिपा है, जो आत्म-विश्वास और लगन से अपनी मंजिल तक पहुँच रहे हैं। उनकी कहानी उन सभी युवा खेलप्रेमियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है जो अपने सपनों को पूरा करने के लिए संघर्षरत हैं।
बेथलाइन की इस उपलब्धि को देखते हुए उम्मीद की जा रही है कि वह आने वाले वर्षों में और भी बेहतर प्रदर्शन करेंगी और राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन करेंगी।

