लोकसभा चुनाव 2024 के लिए हुए विश्लेषण में यह सामने आया है कि कुल 8,360 उम्मीदवारों में से केवल 800 महिलाएं थीं, जो कुल उम्मीदवारों का केवल 9.6% हिस्सा बनती हैं। यह आंकड़ा महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी के लिहाज से चिंताजनक है।
साथ ही, 543 लोकसभा क्षेत्रों में से 152 विधानसभा क्षेत्रों में एक भी महिला उम्मीदवार नहीं थी, जो कुल क्षेत्रों का 28% है। यह तथ्य भारतीय राजनीति में महिलाओं की प्रतिनिधित्व की कमी को दर्शाता है।
असोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) द्वारा किए गए इस विश्लेषण में महिलाओं की कम भागीदारी के विभिन्न सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक कारणों को उजागर किया गया है। महिलाओं द्वारा चुनाव लड़ने की संख्या कम होने के पीछे पारिवारिक जिम्मेदारियां, राजनीतिक दलों की प्राथमिकता में कमी और संसाधनों की कमी प्रमुख कारण बताए जा रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में महिलाओं की सहभागिता बढ़ाना आवश्यक है क्योंकि वे न केवल समाज की विविधता का प्रतिनिधित्व करती हैं बल्कि निर्णयों में संतुलित दृष्टिकोण भी लाती हैं। महिला सशक्तिकरण और समान प्रतिनिधित्व के लिए रुझान बदलने की जरूरत है।
इस रिपोर्ट के अनुसार, राजनीतिक दलों को महिलाओं को न केवल ज्यादा उम्मीदवार बनाना चाहिए बल्कि उन्हें चुनाव जीतने के लिए जरुरी समर्थन और संसाधन भी उपलब्ध कराने चाहिए। इससे न केवल महिलाओं का समावेश बढ़ेगा, बल्कि राजनीतिक प्रक्रिया भी अधिक समावेशी और प्रगतिशील बनेगी।
देश के सामाजिक और राजनीतिक परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए, महिलाओं के लिए चुनावी मैदान को सुगम बनाने के लिए कड़े कदम उठाने की आवश्यकता है। इससे लोकतंत्र मजबूत होगा और समाज की वास्तविक तस्वीर संसद में भी स्पष्ट रूप से दिखेगी।

