राजेंद्र बनहट्टी और कमल देसाई की रचनाएँ हिंदी अनुवाद में जीवंत होकर सामने आई हैं, जिनका श्रेय अनुवादक जेरी पिंटो और शांता गोखले को जाता है। ये दोनों लेखक मराठी साहित्य के माने हुए स्तंभ हैं, जिनकी कहानियाँ गहराई और संवेदनशीलता से भरी हुई हैं। जिन पाठकों ने मूल मराठी में नहीं पढ़ा, उनके लिए यह अनुवाद एक नए साहित्यिक संसार का द्वार खोलता है।
राजेंद्र बनहट्टी की ‘माई लास्ट ऑटोबायोग्राफी’ एक आत्मकथात्मक लघु कथा है, जो एक व्यक्ति के जीवन के अंतिम क्षणों को नाटकीय एवं भावपूर्ण रूप में प्रतिबिंबित करती है। उनकी लेखनी में जो गूढ़ता और सामाजिक व्यंग्य है, वह अनुवाद में भी पूरी तरह से सजीव है। जेरी पिंटो ने इसे सूक्ष्मता और सटीकता से हिंदी में परोसा है, जिससे मूल भावना बिल्कुल कायम रहती है।
वहीं, कमल देसाई की ‘द वूमन हू वॉर अ हैट’ महिला सशक्तिकरण और सामाजिक बंधनों से लड़ने वाली एक आदर्श रूपरेखा प्रस्तुत करती है। शांता गोखले के अनुवाद में इस कहानी का भाव और उसकी तीव्रता सरल, स्पष्ट हिंदी में प्रभावशाली ढंग से पहुंचती है। यह कथा नारी जीवन की जटिलताओं और स्वतंत्रता की चाह को विस्तार से दर्शाती है।
दोनों कृतियाँ मराठी साहित्य की विविधता और गहराई को प्रदर्शित करती हैं, और हिंदी के पाठकों के लिए एक महत्वपूर्ण साहित्यिक पूरक बनती हैं। यह अनुवाद न केवल भाषाई रूपांतरण है, बल्कि सांस्कृतिक और भावनात्मक समृद्धि का भी संवाहक है। साहित्य प्रेमियों के लिए यह संग्रह निश्चित ही विचारणीय और प्रेरक साबित होगा।

