अन्ना हजारे ने हाल ही में आरटीआई नियमों में प्रस्तावित संशोधनों पर कड़ी आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि शुल्क वृद्धि के लिए कोई तार्किक स्पष्टीकरण या वित्तीय विश्लेषण प्रस्तुत नहीं किया गया है, जो एक गंभीर चिंता का विषय है। इस संबंध में उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि सरकार इस अडचनों को दूर नहीं करती है तो 5 जुलाई से वे तेज और प्रभावी आंदोलन शुरू करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
अन्ना हजारे, जो भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन के लिए विख्यात हैं, ने कहा कि सूचना के अधिकार को मजबूत बनाने के बजाय इसके नियमों में संशोधन जनता के मूल अधिकारों के खिलाफ है। उन्होंने सरकार से अपील की है कि संशोधनों को पुनः विचार की प्रक्रिया में लें और आम जनता के हितों का ध्यान रखें।
उन्होंने यह भी कहा कि सूचना तक पहुंच सरल और लागत में कम होनी चाहिए ताकि हर व्यक्ति इसे आसानी से प्राप्त कर सके। प्रस्तावित शुल्क वृद्धि से आम नागरिकों के लिए आरटीआई का उपयोग करना महंगा और मुश्किल हो जाएगा, जो इसके उद्देश्य पर विपरीत प्रभाव डालेगा।
साथ ही, अन्ना हजारे ने कहा कि यदि सरकार उनके संदेश को समझती है तो वे शांति और संवाद के माध्यम से समाधान निकालने के लिए तैयार हैं, लेकिन अगर उनके सुझावों को नजरअंदाज किया गया तो वे जनता के साथ मिलकर तेज आंदोलन करेंगे।
इस पूरे मुद्दे पर सामाजिक संगठनों और जनहित कार्यकर्ताओं ने भी समर्थन जताया है। उनका मानना है कि आरटीआई प्रणाली को पारदर्शिता बढ़ाने और सरकारी जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए डिजाइन किया गया है, और इसे कमजोर करना लोकतंत्र के लिए हानिकारक होगा।
सरकार से ध्यान देने की उम्मीद जताई जा रही है ताकि किसी भी प्रकार के विवाद और जनता के विश्वास में कमी से बचा जा सके। अन्ना हजारे के नेतृत्व में यह आंदोलन निश्चित रूप से एक व्यापक जन आंदोलन बन सकता है, जो आरटीआई के अधिकारों की रक्षा करेगा।

