मध्य प्रदेश में कृषि उपज मंडी टैक्स वृद्धि ने व्यापारियों और किसानों के बीच भारी विरोध-प्रदर्शन को जन्म दिया है। राज्य सरकार द्वारा मंडी टैक्स की दर 1.20 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.70 प्रतिशत करने की घोषणा ने प्रदेश भर की कृषि उपज मंडियों को बंद कर दिया है। इस कदम के विरोध में व्यापारिक संगठन हड़ताल पर हैं, जिससे मंडियों में खरीद-बिक्री पूरी तरह ठप हो गई है।
व्यापारी संगठनों का मानना है कि इस बढ़ोत्तरी के कारण व्यापारियों पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा, जो किसानों और उपभोक्ताओं तक अपनी कीमत पहुंचेगा। उनका तर्क है कि वर्तमान में ही कृषि व्यापार कई चुनौतियों का सामना कर रहा है, ऐसे समय में टैक्स वृद्धि अव्यवहारिक है। इसलिए कई व्यापारिक संगठनों ने मंडी सचिवों को आधिकारिक रूप से हड़ताल की सूचना दे दी है।
व्यापारियों की नाराजगी के कारण
व्यापारियों का आरोप है कि मध्य प्रदेश में मंडी टैक्स पहले से दूसरे राज्यों की तुलना में ज्यादा है। वे बताते हैं कि महाराष्ट्र और गुजरात जैसे पड़ोसी राज्यों में मंडी शुल्क काफी कम रखा गया है, जिससे वहां के व्यापारी ज्यादा प्रतिस्पर्धी बने हुए हैं। वे चेतावनी देते हैं कि यदि मध्य प्रदेश में यह वृद्धि जारी रही, तो बड़े व्यापारी और प्रोसेसिंग कंपनियां दूसरे राज्यों में अपनी गतिविधियां केंद्रित कर सकती हैं।
इसके अलावा, गेहूं, सोयाबीन, चना, मसूर और तिलहन जैसी प्रमुख फसलों के व्यापार पर इसका विपरीत प्रभाव पड़ सकता है। मंडियों में कारोबार घटने से स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी नकारात्मक प्रभाव होगा। व्यापारिक संगठनों का सुझाव है कि सरकार को राजस्व संग्रह बढ़ाने के साथ-साथ व्यापार को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता है, ताकि समस्याएं न बढ़ें।
किसानों और उपभोक्ताओं की चिंता
इस विवाद में किसान भी अपनी चिंताएं व्यक्त कर रहे हैं। उनका कहना है कि जब व्यापारियों की लागत बढ़ेगी, तो इसके प्रभाव से बिक्री मूल्य कम होने या स्थिर रहने की संभावना है, जिससे किसानों को उचित दाम नहीं मिल पाएंगे। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, यदि व्यापार पर अतिरिक्त कर लगाया जाता है तो अंततः इसका असर उपभोक्ताओं पर महंगाई के रूप में पड़ सकता है।
मंडी बंद रहने से एक दिन के लिए किसानों की फसल की नीलामी प्रभावित होती है, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालती है। किसान अपनी फसल मंडियों में लेकर आते हैं और उसी दिन बिक्री की उम्मीद रखते हैं, लेकिन हड़ताल के कारण वे आर्थिक नुकसान झेल सकते हैं। फिलहाल, व्यापारी संगठन राज्य सरकार से इस फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग कर रहे हैं।

