अयोध्या में राम मंदिर दान प्रकरण को लेकर साधु-संतों में गहरा आक्रोश देखنے को मिल रहा है। इस मामले में दर्ज एफआईआर में ट्रस्ट के बड़े अधिकारियों के नाम शामिल न होने पर संतों ने तीव्र प्रतिक्रिया व्यक्त की है। अयोध्या के हनुमानगढ़ी के महंत धर्मदास ने इस एफआईआर को विवादित बताते हुए ट्रस्ट के सदस्यों को ‘चोर’ करार दिया और कहा कि भगवान ही इस न्यायिक प्रक्रिया में अंतिम फैसला करेंगे।
महंत धर्मदास ने कहा, “ट्रस्ट के सदस्य ही ट्रस्ट के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा रहे हैं, जो स्पष्ट करता है कि सच्चाई क्या है और क्या गलत। हमें विश्वास है कि भगवान इस मुद्दे का सही समाधान करेंगे।” उन्होंने यह भी कहा कि बड़े पद पर बैठा व्यक्ति पूरी तरह जिम्मेदार होता है और एक भी पैसा चोरी होना चोरी के बराबर है। उन्होंने तीखा आरोप लगाते हुए कहा, “अब चोर ही चोर-चोर चिल्ला रहे हैं।”
महंत धर्मदास ने यह भी कहा कि शिला पूजन से लेकर आज तक ट्रस्ट के सदस्यों ने कई तरह के अनियमित कार्य किए हैं। उन्होंने यह बताया कि राम जन्मभूमि सेवा समिति को दिया गया दान बिना उनकी सहमति के राम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट में बदल दिया गया, जिसने अयोध्या के साधु-संतों के अधिकारों को छीना है।
इसी बीच, स्वामी करपात्री जी महाराज ने भी इस एफआईआर और एसआईटी जांच की आलोचना की है। उनका कहना है कि एफआईआर में मुख्य दोषियों के नाम शामिल नहीं किए गए हैं और केवल छोटी जिम्मेदारी वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा, “मैं इस जांच से संतुष्ट नहीं हूं क्योंकि ऐसा प्रतीत होता है कि बड़ी गड़बड़ी के जिम्मेदार लोगों को बचाया जा रहा है।”
स्वामी करपात्री जी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मांग की है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों को कड़ी सजा दी जाए। उनका कहना है कि न्याय के लिए सही और पारदर्शी जांच आवश्यक है ताकि मंदिर निर्माण के पवित्र कार्य में कोई बाधा न आए।
इस विवाद के बीच अयोध्या के संतों का यह रुख इस मामले की गंभीरता को दर्शाता है और यह स्पष्ट करता है कि संत जनता के विश्वास को बनाए रखने के लिए गहराई से चिंतित हैं। आगे की जांच और कार्रवाई पर सभी की नजरें लगी हुई हैं।
आईएएनएस के इनपुट के साथ

