लखनऊ: अयोध्या में राम मंदिर से जुड़ी भूमि खरीद-फरोख्त और वित्तीय मामलों को लेकर एक बार फिर विवाद गहराने लगा है। आम आदमी पार्टी (आप) के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने विशेष जांच दल (SIT) के अध्यक्ष विजय विश्वास पंत से मुलाकात कर कथित भूमि घोटाले के सबूत सौंपे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि लगभग चार करोड़ रुपये की जमीन को आठ करोड़ रुपये में खरीदा गया, जो कि एक गंभीर अनियमितता है।
मीडिया से बातचीत में संजय सिंह ने बताया कि अयोध्या में राम मंदिर से जुड़े भूमि लेन-देन में अवैध धन का इस्तेमाल किया गया है और कई मामलों में जमीन बेचने वाली भूमि के वास्तविक बाजार मूल्य से अधिक धनराशि ली गई है। उन्होंने कहा कि ये सबूत मुकम्मल हैं और जांच एजेंसी को दिए गए हैं ताकि मामले की तह तक पहुंचा जा सके।
संजय सिंह ने यह भी बताया कि ज़मीन खरीद में शामिल कुछ व्यक्तियों और संस्थाओं के नाम ऐसे हैं जिनका राम मंदिर ट्रस्ट से गहरा संबंध बताया जा रहा है। उन्होंने बताया कि जांच एजेंसी को उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों में वित्तीय लेन-देन के ऐसे रिकॉर्ड हैं जो इस पूरे मामले को उजागर करते हैं।
जांच में पारदर्शिता और निष्पक्षता की जरूरत
सांसद ने एसआईटी से उम्मीद जताई है कि जांच निष्पक्ष और पारदर्शी होगी और दोषियों को किसी भी प्रकार की छूट नहीं मिलेगी। उन्होंने कहा कि इस तरह की अनियमितताओं से न केवल समाज में विश्वास कमजोर होता है बल्कि धार्मिक आस्था पर भी असर पड़ता है। इसलिए इसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए और उचित कार्रवाई होनी चाहिए।
पूर्व ऑडिट रिपोर्ट भी उठा चुकी थी सवाल
सूत्र बताते हैं कि वर्ष 2020 में राम मंदिर ट्रस्ट की वित्तीय व्यवस्था की जांच करने वाली एक निजी ऑडिट फर्म ने अपनी रिपोर्ट में कई खामियों को उजागर किया था। रिपोर्ट में प्रशासनिक जवाबदेही, रिकॉर्ड में असंगतियों और पारदर्शिता की कमी को लेकर चेतावनी दी गई थी। हालांकि तब इस रिपोर्ट पर गंभीर ध्यान नहीं दिया गया था।
वित्तीय मानक और सिस्टम की कमी
ऑडिट रिपोर्ट में यह सुझाव भी शामिल था कि राम मंदिर ट्रस्ट को वित्तीय और प्रशासनिक कार्यों के लिए स्पष्ट मानक संचालन प्रक्रियाएं (एसओपी) अपनानी चाहिएं। बिना सक्षम प्रणाली के बड़ी मात्रा में धन और संपत्ति के लेन-देन को नियंत्रित करना मुश्किल होता है, जिससे गड़बड़ी की संभावना बढ़ जाती है।
दान और प्रबंधकीय रिकॉर्ड पर उठे सवाल
सबसे गंभीर चिंताएं दान, चढ़ावे और अन्य मूल्यवान वस्तुओं के रिकॉर्ड से जुड़ी हैं। रिपोर्ट ने कहा था कि सोना, चांदी और आभूषण जैसे कीमती दानों को व्यवस्थित तरीके से दर्ज एवं सुरक्षित रखे जाने की व्यवस्था ट्रस्ट द्वारा करनी चाहिए। इसके साथ ही डिजिटल रिकॉर्ड की निगरानी और डेटा सुरक्षा के लिए कड़े नियम बनाना आवश्यक है।
एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट पर सबकी निगाहें
भारी सबूतों और पुरानी ऑडिट रिपोर्ट के मद्देनजर विशेष जांच दल की जांच पर सभी की निगाहें टिकी हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच किस दिशा में जाती है और क्या राम मंदिर से जुड़े वित्तीय और भूमि विवादों में किसी की संलिप्तता पाई जाती है। जांच के नतीजे आने पर ही भविष्य में उचित कार्रवाई की राह साफ होगी।

