शेयर बाजार में ऐतिहासिक तेजी: सेंसेक्स 8.82% और निफ्टी 8.58% उछले, विदेशी निवेशकों ने लगाए 45,960 करोड़ रुपये

Rashtrabaan News Desk
Highlights
  • विदेशी निवेशकों ने बाजार में लगाए 45,960 करोड़ रुपये, बैंकिंग और वित्तीय शेयरों में दिखी जोरदार खरीदारी
  • मजबूत तिमाही नतीजों, बेहतर जीएसटी संग्रह और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से बाजार को मिला सहारा

मुंबई, राष्ट्रबाण। भारतीय शेयर बाजार के लिए यह सप्ताह शानदार रहा। विदेशी निवेशकों की मजबूत खरीदारी, घरेलू अर्थव्यवस्था के बेहतर संकेतकों और वैश्विक स्तर पर अनुकूल माहौल के चलते सेंसेक्स और निफ्टी में एक साल से अधिक समय की सबसे बड़ी साप्ताहिक तेजी दर्ज की गई। सप्ताह के दौरान दोनों प्रमुख सूचकांक 8 फीसदी से ज्यादा चढ़े, जिससे निवेशकों के भरोसे में भी सुधार देखने को मिला। सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन शुक्रवार को सेंसेक्स 1,718 अंक यानी 2.17 फीसदी की बढ़त के साथ 81,028 अंक पर बंद हुआ। पूरे सप्ताह में सेंसेक्स ने 8.82 फीसदी की छलांग लगाई। वहीं, निफ्टी में साप्ताहिक आधार पर 8.58 फीसदी की तेजी दर्ज की गई। शुक्रवार को निफ्टी करीब 2 फीसदी चढ़कर 25,030 के स्तर पर पहुंच गया। बाजार में आई इस तेजी ने निवेशकों को बड़ी राहत दी।

विदेशी निवेशकों की वापसी से बाजार को मिला सहारा

इस तेजी की सबसे बड़ी वजह विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की भारतीय बाजार में मजबूत वापसी रही। सप्ताह के दौरान विदेशी निवेशकों ने करीब 45,960 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश किया। पिछले कई सप्ताह से जारी बिकवाली के बाद विदेशी पूंजी का यह प्रवाह बाजार के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। बाजार की तेजी में बैंकिंग शेयरों की अहम भूमिका रही। बैंक निफ्टी सप्ताह के दौरान करीब 8 फीसदी चढ़ा। इसके अलावा वित्तीय सेवाएं, निजी बैंक, रियल एस्टेट और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर के शेयरों में भी अच्छी खरीदारी देखने को मिली। बड़े शेयरों के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप कंपनियों में भी तेजी दर्ज की गई। निफ्टी मिडकैप 100 में 5.77 फीसदी और निफ्टी स्मॉलकैप 100 में 2.77 फीसदी की बढ़त रही।

मजबूत आर्थिक संकेतकों से निवेशकों का भरोसा बढ़ा

विश्लेषकों के मुताबिक, कंपनियों के दूसरी तिमाही के बेहतर नतीजे, अक्टूबर में ऑटोमोबाइल बिक्री में सुधार और मजबूत जीएसटी संग्रह ने घरेलू बाजार को मजबूती दी। इसके साथ ही वैश्विक स्तर पर निवेशकों की सकारात्मक धारणा का भी भारतीय बाजार को फायदा मिला। अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दरों को स्थिर रखने के फैसले ने भी बाजार की धारणा को समर्थन दिया। वहीं, अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के नतीजों के बाद वैश्विक निवेशकों को व्यापार शुल्क और ईरान से जुड़े तनाव में नरमी की उम्मीद दिखाई दी। हालांकि, अमेरिकी बाजार में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में गिरावट के कारण दबाव भी देखने को मिला। गुरुवार को अमेरिकी बाजार में बिकवाली के चलते एसएंडपी 500 कंपनियों के कुल बाजार मूल्य में करीब 3 ट्रिलियन डॉलर की कमी आई। इसका असर एशिया के कई तकनीक-प्रधान बाजारों पर भी पड़ा, लेकिन भारतीय बाजार में तेजी बनी रही।

कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से भारत को राहत

कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट भी भारतीय शेयर बाजार के लिए सकारात्मक रही। सप्ताह के दौरान डब्ल्यूटीआई क्रूड की कीमत 104-105 डॉलर प्रति बैरल से घटकर करीब 90 डॉलर पर आ गई। वहीं, ब्रेंट क्रूड 97-98 डॉलर के दायरे में पहुंच गया। दोनों प्रमुख बेंचमार्क में साप्ताहिक आधार पर 12 फीसदी से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें घटने से देश के आयात बिल, महंगाई और कंपनियों की लागत पर सकारात्मक असर पड़ सकता है। इसी उम्मीद ने निवेशकों की धारणा को मजबूती दी।

आने वाले दिनों में इन आंकड़ों पर रहेगी नजर

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि विदेशी निवेशकों की खरीदारी जारी रहती है और वैश्विक परिस्थितियां अनुकूल बनी रहती हैं, तो भारतीय शेयर बाजार में तेजी का रुख आगे भी कायम रह सकता है। हालांकि, वैश्विक घटनाक्रम और आर्थिक आंकड़ों के आधार पर बाजार में उतार-चढ़ाव की संभावना बनी रहेगी। विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले सप्ताहों में अमेरिकी रोजगार के आंकड़े और उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) के नतीजे वैश्विक बाजारों की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे। घरेलू स्तर पर निवेशकों की नजर महंगाई के आंकड़ों और कंपनियों के शेष तिमाही नतीजों पर रहेगी।

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