सिवनी, राष्ट्रबाण। सिवनी जिले के घंसौर विकासखंड के अंतर्गत प्रशासनिक संवेदनहीनता का एक बेहद शर्मनाक और झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। यहां एक वृद्ध दंपत्ति, जो अपनी रोजी-रोटी और जीवन के अंतिम पड़ाव की बुनियादी जरूरतों के लिए दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर है, उसने न्याय की आस में अनुविभागीय दंडाधिकारी के समक्ष जनसुनवाई में गुहार लगाई थी। आवेदन दिए हुए पूरा एक महीना बीत चुका है, लेकिन सिस्टम की सुस्त रफ्तार और उदासीन रवैये के कारण कार्रवाई के नाम पर स्थिति पूरी तरह ‘शून्य’ बनी हुई है।
क्या है पूरा मामला?
यह पूरा मामला घंसौर तहसील के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत सरसडोल के ग्राम चतुवा का है। यहाँ के निवासी 63 वर्षीय वृद्ध कैलाश चंद्र कौशल और उनकी 60 वर्षीय पत्नी राजेश्वरी कौशल आज दो जून की रोटी और वृद्धावस्था के सहारे के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
दंपत्ति के पास शासन द्वारा जारी परिवार समग्र आईडी क्रमांक 49589225 दर्ज है, बावजूद इसके वे उन मूलभूत अधिकारों से वंचित हैं, जिनका वादा सरकार हर गरीब और बुजुर्ग नागरिक से करती है।
पात्रता पर्ची और पेंशन से वंचित वृद्ध दंपत्ति का दर्द
दंपत्ति द्वारा दिए गए मूल आवेदन पत्र में यह स्पष्ट रूप से दर्द बयां किया गया है कि उनकी उम्र क्रमशः 63 और 60 वर्ष हो चुकी है। इस ढलती उम्र और शारीरिक कमजोरी के कारण वे कड़ा श्रम या मजदूरी करने में पूरी तरह असमर्थ हैं। समग्र आईडी होने के बावजूद आज दिनांक तक उनके नाम पर शासकीय पात्रता पर्ची जारी नहीं की गई है। नतीजतन, शासन द्वारा गरीब परिवारों को मिलने वाला राशन उन्हें नसीब नहीं हो रहा है। इसके अलावा, उम्र के इस पड़ाव पर मिलने वाली वृद्धावस्था पेंशन योजना का लाभ भी उन्हें नहीं मिल पा रहा है, जिससे उनके सामने भुखमरी और भारी आर्थिक तंगी का संकट खड़ा हो गया है।
ग्राम पंचायत स्तर पर अनसुनी गुहार, शून्य हुई कार्रवाई
पीड़ित वृद्ध दंपत्ति ने बताया कि उन्होंने ग्राम पंचायत सरसडोल के चक्कर लगाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। पंचायत स्तर पर बार-बार गुहार लगाने और अधिकारियों के सामने हाथ जोड़ने के बावजूद उनकी समस्या पर किसी ने ध्यान नहीं दिया। पंचायत स्तर से लेकर अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ उन्हें पूरी तरह वंचित कर दिया गया है। जब स्थानीय स्तर पर न्याय नहीं मिला, तो उन्होंने मजबूर होकर अनुविभागीय दंडाधिकारी घंसौर के समक्ष जनसुनवाई में आवेदन प्रस्तुत किया। सीईओ जनपद घंसौर को 15/09/2026 को शिकायत की गई। लेकिन विडंबना यह है कि जनसुनवाई में आवेदन सौंपे हुए एक पूरा महीना बीत चुका है, और धरातल पर कार्रवाई के नाम पर नतीजा सिफर है। अधिकारी फाइल दबाकर बैठे हैं और वृद्ध दंपत्ति रोज अपनी जिंदगी की जंग लड़ने को विवश हैं।
प्रशासनिक विफलता पर सवाल
यह मामला कई सवाल खड़े करता है, क्या जनसुनवाई सिर्फ कागजी खानापूर्ति का जरिया बनकर रह गई है? जब जनसुनवाई में दिए गए आवेदनों पर एक महीने बाद भी कोई एक्शन नहीं होता, तो आम जनता किस पर भरोसा करे? जब समग्र आईडी मौजूद है, तो पात्रता पर्ची जारी करने में एक महीने से अधिक समय क्यों लग रहा है? क्या प्रशासन किसी बड़ी अनहोनी या वृद्धों की भुखमरी का इंतजार कर रहा है?
प्रशासन से कार्रवाई की मांग
इस मामले ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि मैदानी स्तर पर सरकारी योजनाएं किस तरह फाइलों के जाल में उलझकर दम तोड़ रही हैं। पीड़ित वृद्ध दंपत्ति ने एक बार फिर उच्च अधिकारियों से मांग की है कि उनके मामले की तुरंत जांच कराई जाए, उनकी समग्र आईडी पर तत्काल पात्रता पर्ची जारी की जाए, और उनकी वृद्धावस्था पेंशन को तुरंत प्रभाव से शुरू किया जाए। यदि अब भी जिम्मेदार अधिकारियों ने आंखें नहीं खोलीं, तो यह मान लिया जाएगा कि शासन की योजनाएं सिर्फ विज्ञापनों तक सीमित हैं और गरीबों के हक पर प्रशासनिक लापरवाही का ताला जड़ा हुआ है।


