विश्व संगीत दिवस के अवसर पर, भारतीय संगीत जगत के लोकप्रिय गायक विजयनारायण रंगराजन ने अपनी संगीत यात्रा और प्रेरणाओं पर खुलकर बातचीत की। रंगराजन ने बताया कि उनकी यह यात्रा केवल संगीत की नहीं, बल्कि आत्म-खोज की भी रही है, जिसने उन्हें न केवल एक बेहतर कलाकार बनाया बल्कि एक संवेदनशील इंसान के रूप में भी परिभाषित किया।
विजयनारायण ने साझा किया कि उनके गाने उनकी जीवन की कहानियाँ हैं, जिनमें उनके अनुभव, भावनाएँ और संस्कृति का गहरा प्रभाव होता है। उनकी रचनात्मक प्रक्रिया एक अंदरूनी संघर्ष और सृजनात्मक सोच का मिश्रण है, जो हर गीत को खास बनाता है। कहा कि वे अपने संगीत में विभिन्न शैलियों को मिलाकर एक अनूठा प्रयोग करना पसंद करते हैं, जिससे प्रत्येक गीत में एक नई पहचान मिलती है।
उन्होंने यह भी बताया कि उनके संगीत पर उनके परिवार, बचपन की यादें, और विश्व संगीत का गहरा प्रभाव पड़ा है। उनके लिए संगीत केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि एक ऐसा मंच है जहां वे अपनी सोच और भावनाओं को साझा करते हैं। रंगराजन ने उन कलाकारों का भी उल्लेख किया जिनसे उन्हें प्रेरणा मिली, जिनकी संवेदनशीलता और कला से उन्होंने काफी कुछ सीखा।
इस खास दिन पर, विजयनारायण रंगराजन ने सभी संगीत प्रेमियों को यह संदेश दिया कि संगीत केवल स्वरों का मिश्रण नहीं, बल्कि आत्मा की भाषा है। उन्होंने कहा कि संगीत से जीवन जुड़ा होता है, जो हमें हमारी जड़ों से जोड़ता है और हमें एक बेहतर इंसान बनाता है।
अंत में, विजयनारायण ने यह उम्मीद जताई कि आने वाले वर्षों में वे अपने संगीत के जरिए और गहराई से अपनी कहानियाँ सुनाने में सक्षम होंगे और विश्व संगीत के मंच पर अपनी एक मजबूत पहचान बनाएंगे।

