NCERT ने इस वर्ष अपनी कक्षा 9 की सामाजिक विज्ञान की नई पाठ्यपुस्तक ‘Understanding Society: India and Beyond’ में इमरजेंसी यानि आपातकाल से जुड़ा एक महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ा है। यह अध्याय ‘लोकतंत्र की चुनौतियाँ’ शीर्षक के अंतर्गत है, जिसमें 1975 से 1977 तक लागू किए गए आपातकाल के दौरान हुई भारतीय लोकतंत्र पर गहरी छाप और नागरिक अधिकारों पर इसके प्रभाव का उल्लेख है। पाठ्यक्रम में यह स्पष्ट किया गया है कि आपातकाल के दौरान मौलिक अधिकारों को निलंबित कर दिया गया और प्रेस सेंसरशिप के चलते बड़े पैमाने पर गिरफ्तारी हुई।
हालांकि इस पाठ को लेकर राजनीतिक विवाद भी छिड़ गया है। मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने NCERT और केंद्र की भाजपा सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा है कि इस पाठ के माध्यम से भाजपा इतिहास को तोड़-मरोड़कर जनता को भ्रमित करने का प्रयास कर रही है। सिंघार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि यह अध्याय एकतरफा नजरिए से लिखा गया है, जो सत्ताधारी दल की सियासी चाल है।
इतिहास का राजनीतिकरण और एकतरफा प्रस्तुति
उमंग सिंघार ने आरोप लगाया कि NCERT की इस नई किताब में आपातकाल को लेकर इतिहास को पूरी तरह से पक्षपातपूर्ण रूप में प्रस्तुत किया गया है। उन्होंने कहा कि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और विपक्षी आंदोलनों के संबंध में पाठ काफी पक्षपातरहित नहीं है, जबकि उस दौर की जटिलताओं और संप्रभुता पर लगे खतरे को नज़रअंदाज किया गया है। उनका कहना है कि राजनीति के नाम पर बालकों के मन में भ्रम पैदा करना शिक्षा व्यवस्था का गलत उपयोग है।
जनता का परीक्षा परिणाम: 1980 का चुनाव
सिंघार ने आगे कहा कि यदि आपातकाल का दौर केवल आलोचना योग्य था, तो 1980 में जनता ने इंदिरा गांधी को प्रचंड बहुमत क्यों दिया? उन्होंने भाजपा से सवाल किया कि वह इस ऐतिहासिक जनादेश को क्यों छिपाती है। इसका जवाब है कि लोकतंत्र की सबसे बड़ी अदालत – जनता ने अपने मत से यह स्पष्ट कर दिया था कि देश को मजबूत नेतृत्व और स्थिरता की आवश्यकता थी।
इतिहास की पाठ्यपुस्तकों का गलत इस्तेमाल
कांग्रेस नेता ने कहा कि क्या NCERT की पुस्तकों में 1980 के चुनाव और जनता के विश्वास को भी उतनी ही प्रमुखता मिलेगी? या फिर इतिहास को केवल विपक्ष पर निशाना साधने और कीचड़ उछालने के लिए एक चुनावी हथियार बनाया जा रहा है?
सरकार से शिक्षा के भगवाकरण को रोकने की अपील
उमंग सिंघार ने सरकार से अपील की कि वह शिक्षा के भगवाकरण और इतिहास में छेड़छाड़ की इस घिनौनी राजनीति को बंद करे। उन्होंने कहा कि पाठ्यपुस्तकों में दबाव में बदलाव से महान नेताओं के योगदान को मिटाया नहीं जा सकता। जनता का जनादेश इस बात का प्रमाण है कि देश को उस वक्त स्थिरता और मजबूत नेतृत्व की अहमियत समझ में आई थी।

