नई दिल्ली, राष्ट्रबाण। भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि उसकी विदेश नीति किसी दूसरे देश के दबाव या निर्देशों से तय नहीं होगी। विदेश मंत्री जयशंकर ने अमेरिका के साथ रणनीतिक साझेदारी और रूस से तेल खरीदने जैसे मुद्दों पर भारत का रुख मजबूती से रखा है। उन्होंने साफ संदेश दिया कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि रखकर स्वतंत्र फैसले लेने के लिए प्रतिबद्ध है। उनके रुख को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की दबाव की राजनीति के जवाब के तौर पर देखा जा रहा है।
अटलांटा में आयोजित जी-20 विदेश मंत्रियों की बैठक और क्वाड से जुड़ी बातचीत के दौरान भारत ने अपनी रणनीतिक स्वायत्तता पर जोर दिया। भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के विदेश मंत्रियों की क्वाड बैठक में जयशंकर के साथ अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो, जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी और ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग शामिल हुईं।
बैठक के दौरान जयशंकर ने अंतरराष्ट्रीय संबंधों में किसी भी देश पर दबाव बनाने की नीति को लेकर भारत का रुख स्पष्ट किया। खासकर रूस से तेल खरीदने के मामले में भारत ने कहा है कि उसकी ऊर्जा नीति देश की जरूरतों और राष्ट्रीय हितों के आधार पर तय होती है। अमेरिका के साथ क्वाड जैसे महत्वपूर्ण मंच पर साझेदारी होने के बावजूद भारत हर मुद्दे पर वाशिंगटन के विचारों से सहमत होने के लिए बाध्य नहीं है।
जयशंकर ने वैश्विक संघर्षों का मुद्दा उठाकर कहा कि युद्धों और अंतरराष्ट्रीय तनाव का असर केवल संघर्ष में शामिल देशों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरी दुनिया को इसकी आर्थिक और अन्य कीमत चुकानी पड़ती है।
आतंकवाद के मुद्दे पर भी भारत अपना सख्त रुख दिखाया है। जयशंकर स्पष्ट कर चुके हैं कि आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस भारत की नीति है और इस मामले में किसी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। भारत का रुख चीन और अमेरिका सहित सभी वैश्विक शक्तियों के लिए स्पष्ट संदेश माना जा रहा है कि नई दिल्ली अपनी विदेश नीति स्वतंत्र रूप से तय करेगी। रणनीतिक साझेदारी के बावजूद राष्ट्रीय हितों से समझौता नहीं किया जाएगा।
“विदेश नीति दबाव से नहीं, राष्ट्रीय हित से तय होगी”: क्वाड और G20 बैठक में भारत का कड़ा रुख

Highlights
- "दबाव की नीति नामंजूर": रूस से तेल और रणनीतिक साझेदारी पर भारत का स्पष्ट रुख
- क्वाड मंच से कड़ा संदेश: राष्ट्रीय हित सर्वोपरि, आतंकवाद पर 'जीरो टॉलरेंस' नीति
- चीन और अमेरिका को दो टूक संदेश: रणनीतिक साझेदारी अपनी जगह, स्वतंत्रता से कोई समझौता नहीं
