छत्तीसगढ़ के ऊर्जा क्षेत्र में 5.60 लाख करोड़ के निवेश की तैयारी, CM साय ने वैश्विक निवेशकों को दिया न्योता

Chhattisgarh Rashtrabaan

    रायपुर : छत्तीसगढ़ को ऊर्जा क्षेत्र में निवेश का बड़ा केंद्र बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने अपनी योजनाएं सामने रखी हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित भारत नवीकरणीय ऊर्जा शिखर सम्मेलन एवं एक्सपो 2026 में अगले पांच वर्षों के दौरान प्रदेश के ऊर्जा क्षेत्र में करीब 5.60 लाख करोड़ रुपये के निवेश की संभावनाएं प्रस्तुत कीं। इस दौरान उन्होंने देश-विदेश से पहुंचे निवेशकों और उद्योगपतियों को छत्तीसगढ़ में निवेश करने के लिए आमंत्रित किया।

    चार दिवसीय वैश्विक सम्मेलन का शुभारंभ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री साय ने केंद्रीय मंत्रियों और विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों की मौजूदगी में आयोजित उच्चस्तरीय गोलमेज बैठक में हिस्सा लिया। इस अवसर पर केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रह्लाद जोशी और केंद्रीय राज्य मंत्री श्रीपाद नाइक भी उपस्थित रहे।

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    ऊर्जा परियोजनाओं में बड़े निवेश की योजना

    मुख्यमंत्री साय ने बताया कि राज्य सरकार ने ऊर्जा क्षेत्र के विस्तार के लिए व्यापक कार्ययोजना तैयार की है। इसके तहत 23,923 मेगावाट क्षमता की नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं में करीब 1.33 लाख करोड़ रुपये निवेश करने की योजना है। वहीं, ताप विद्युत उत्पादन क्षमता के विस्तार के लिए लगभग 3.27 लाख करोड़ रुपये के निवेश की संभावना है।

    राज्य सरकार ने वर्ष 2030 तक हरित ऊर्जा उत्पादन क्षमता को मौजूदा 3 हजार मेगावाट से बढ़ाकर 15 हजार मेगावाट करने का लक्ष्य रखा है। इसके साथ ही बिजली की कुल मांग में हरित ऊर्जा की हिस्सेदारी 15 प्रतिशत से बढ़ाकर 45 प्रतिशत से अधिक करने की तैयारी है।

    सीएम साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश ने वर्ष 2030 तक गैर-पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों से 500 गीगावाट बिजली उत्पादन क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा है। इस लक्ष्य को पूरा करने में छत्तीसगढ़ अहम भूमिका निभाएगा। प्रदेश में फिलहाल कोयला आधारित ताप विद्युत संयंत्रों की क्षमता 28 हजार मेगावाट से अधिक है। सरकार अब सौर, जल विद्युत, बायोमास और ऊर्जा भंडारण परियोजनाओं के विकास पर भी जोर दे रही है।

    पंप स्टोरेज और बैटरी ऊर्जा भंडारण पर फोकस

    मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में बिजली की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए ऊर्जा भंडारण सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। इसके तहत 12,300 मेगावाट क्षमता की 10 पंप स्टोरेज जल विद्युत परियोजनाएं चिह्नित की गई हैं। इनमें करीब 65 हजार करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव है।

    इसके अलावा अगले दो वर्षों में 10 हजार मेगावाट-घंटे क्षमता की बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली स्थापित करने की योजना है। राजनांदगांव में 100 मेगावाट की सौर परियोजना के साथ 40 मेगावाट क्षमता और 120 मेगावाट-घंटे भंडारण वाली बैटरी प्रणाली पहले से संचालित है।

    खैरा गांव बना प्रदेश का पहला सौर ऊर्जा संचालित गांव

    सीएम साय ने राजनांदगांव जिले के खैरा गांव का उदाहरण देते हुए बताया कि यह छत्तीसगढ़ का पहला पूरी तरह सौर ऊर्जा से संचालित गांव बन चुका है। यहां सभी 141 घरों की छतों पर 2-2 किलोवाट के सोलर पैनल लगाए गए हैं। इनसे कुल 282 किलोवाट बिजली का उत्पादन हो रहा है। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने 93 घरों को भी सौर ऊर्जा से बिजली मिल रही है। इसके लिए ग्रामीणों को कोई खर्च नहीं करना पड़ा है।

    उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के तहत प्रदेश में अब तक करीब 1.26 लाख सौर ऊर्जा संयंत्र लगाए जा चुके हैं। वहीं, 1.66 लाख सौर सिंचाई पंपों से लगभग 1.94 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि की सिंचाई हो रही है। प्रधानमंत्री कुसुम योजना के तहत भी 395 मेगावाट क्षमता के सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने की योजना है।

    बायोगैस, ग्रीन हाइड्रोजन और परमाणु ऊर्जा में भी निवेश

    मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में कृषि अवशेष, गोबर और अन्य जैविक संसाधनों की पर्याप्त उपलब्धता है। इनके जरिए कंप्रेस्ड बायोगैस, बायो-एथेनॉल और ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन की काफी संभावनाएं हैं।

    प्रदेश में 80 मीट्रिक टन क्षमता के आठ कंप्रेस्ड बायोगैस संयंत्र स्थापित करने की दिशा में काम चल रहा है। इन परियोजनाओं में करीब 800 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है। इसके अलावा निजी निवेशकों से मिले लगभग 6 हजार करोड़ रुपये के प्रस्तावों पर भी प्रक्रिया जारी है।

    सीएम साय ने बताया कि करीब 4,200 मेगावाट क्षमता के परमाणु ऊर्जा संयंत्रों सहित विभिन्न ऊर्जा परियोजनाओं में लगभग 1.60 लाख करोड़ रुपये के निवेश की परिकल्पना की गई है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य औद्योगिक विकास, ऊर्जा सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाते हुए नए उद्योगों और रोजगार के अवसरों को बढ़ावा देना है।

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    वैश्विक निवेशकों के सामने प्रदर्शित की प्रदेश की क्षमता

    सम्मेलन के दौरान मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ के स्टॉल का भी निरीक्षण किया। यहां प्रदेश की प्रमुख ऊर्जा परियोजनाओं, नवीकरणीय ऊर्जा संसाधनों, आधुनिक तकनीक और निवेश की संभावनाओं को प्रदर्शित किया गया। उन्होंने अधिकारियों से परियोजनाओं की जानकारी ली और विभिन्न निवेशकों तथा उद्योग प्रतिनिधियों से चर्चा की।

    मुख्यमंत्री ने निवेशकों को राज्य की औद्योगिक नीतियों, उपलब्ध संसाधनों और ऊर्जा क्षेत्र में विकसित हो रहे बुनियादी ढांचे की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार नई परियोजनाओं और निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए अनुकूल माहौल उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।

    गौरतलब है कि 2 से 5 नवंबर तक आयोजित इस वैश्विक सम्मेलन में 130 से अधिक देशों के प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं। इसमें 40 से अधिक मंत्री, नीति निर्माता, निवेशक और ऊर्जा क्षेत्र की प्रमुख कंपनियों के प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया, डेनमार्क, यूरोपीय संघ, फ्रांस, जर्मनी, नीदरलैंड, नॉर्वे, स्वीडन और यूनाइटेड किंगडम सहित नौ देश एवं समूह कंट्री पार्टनर के रूप में शामिल हैं।

    सम्मेलन में छत्तीसगढ़ समेत 13 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों ने अपनी ऊर्जा क्षमता और निवेश की संभावनाएं प्रस्तुत कीं। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह सहित प्रदेश के अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे।

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