लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने नशा मुक्ति के लिए एक व्यापक और प्रभावशाली जागरूकता अभियान चलाकर इस बुराई के खिलाफ जनांदोलन का रूप दिया है। योगी आदित्यनाथ नेतृत्व वाली सरकार नशे के प्रभावों को खत्म करने और एक स्वस्थ समाज के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है। सरकार ने वर्ष 2025-26 में प्रदेश के सभी हिस्सों में विशेष रूप से युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए विभिन्न गतिविधियों और कार्यक्रमों का आयोजन किया है।
मद्यनिषेध विभाग के माध्यम से गांव, कस्बे, स्कूल और कॉलेज तक नशे के दुष्प्रभावों के बारे में जागरूकता फैलाने का प्रयास किया जा रहा है। इसका उद्देश्य युवा पीढ़ी को नशे से बचाना और उन्हें जिम्मेदार नागरिक बनाना है। केवल कड़ाई से कानूनी कार्रवाई ही नशे के खिलाफ समाधान नहीं हो सकती, इसलिए सरकार ने समाज में जागरूकता बढ़ाने और सही दिशा दिखाने को प्राथमिकता दी है।
शैक्षणिक संस्थानों में प्रतियोगिताओं का आयोजन
प्रदेश के विभिन्न स्कूल और कॉलेजों में नशा विरोधी थीम पर व्यापक रूप से प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। इनमें निबंध लेखन, भाषण, पोस्टर निर्माण, चित्रकला, सांस्कृतिक प्रदर्शन और खेलकूद प्रतियोगिताएं शामिल थीं। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य छात्रों को नशे के खतरों से परिचित कराकर उन्हें सकारात्मक गतिविधियों में जोड़ना है।
मद्यनिषेध विभाग के आंकड़ों के अनुसार पूरे प्रदेश में कुल 1352 प्रतियोगिताएं हुईं, जिनमें हजारों छात्रों ने भाग लिया। बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले 5404 विद्यार्थियों को पुरस्कार और प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए। अधिकारी मानते हैं कि इस प्रकार के आयोजनों से युवाओं में नशे के प्रति सजगता और जिम्मेदार सामाजिक सोच विकसित होती है।
ग्रामीण इलाकों तक पहुंचा अभियान
सरकार ने नशामुक्त उत्तर प्रदेश का लक्ष्य केवल शहरी क्षेत्रों तक सीमित नहीं रखा। ग्रामीण इलाकों में भी जागरूकता कार्यक्रमों का विस्तार किया गया। गांवों में खेलकूद प्रतियोगिताएं, जनसभाएं और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित कर ग्रामीण युवाओं तथा नागरिकों को नशे से बचाव का संदेश दिया गया। इन प्रयासों का स्थानीय स्तर पर सकारात्मक समर्थन मिला है।
सरकार की समझ है कि नशा सिर्फ व्यक्तिगत स्वास्थ्य को ही प्रभावित नहीं करता, बल्कि परिवारों और पूरे समाज को नुकसान पहुंचाता है। इसी कारण हर वर्ग तक जाकर संदेश पहुंचाना अत्यंत जरूरी है।
संगोष्ठियाँ और प्रदर्शनियाँ
मद्यनिषेध विभाग ने राज्य स्तर एवं जिला स्तर पर विशाल जनसंपर्क अभियान चलाया। इस दौरान 40 राज्य स्तरीय और 1727 जिला स्तरीय संगोष्ठियों का आयोजन हुआ, जिनमें शिक्षकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, धर्मगुरुओं और विशेषज्ञों ने भाग लेकर नशामुक्त समाज बनाने का संकल्प लिया।
प्रदेशभर में 356 प्रदर्शनियों के माध्यम से नशे के दुष्परिणामों और उनके सामाजिक-आर्थिक प्रभावों को व्यापक रूप से बताया गया। मेलों, त्योहारों और राष्ट्रीय आयोजनों के दौरान भी विशेष नशा विरोधी अभियान को अंजाम दिया गया।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों से प्रभावी संदेश
सरकार ने जनसामान्य तक संवाद स्थापित करने के लिए सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का भी सहारा लिया। पूरे वर्ष 829 सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें नुक्कड़ नाटक, कठपुतली शो, लोकगीत, कव्वाली, और अन्य प्रदर्शन शामिल थे। इन माध्यमों से नशे के खतरे लोगों तक सरल और प्रभावी ढंग से पहुंचाए गए।
सरकार का मानना है कि सामाजिक सहभागिता और निरंतर जागरूकता अभियान के माध्यम से ही एक नशामुक्त उत्तर प्रदेश का सपना साकार किया जा सकता है। आने वाले समय में इस अभियान को और भी विस्तारित और प्रभावशाली बनाने की योजना है।

