मध्य प्रदेश के गृह विभाग ने राज्य में कानून व्यवस्था को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से शनिवार की देर रात 65 पुलिस अधिकारियों के बड़े तबादले किए हैं। इन तबादलों के तहत डीएसपी, एसडीओपी और एसीपी स्तर के अधिकारियों को नई-नई जिम्मेदारियां दी गई हैं। इस कार्यवाही से प्रदेश के कई महत्वपूर्ण जिलों में पुलिस कप्तानों समेत अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के चेहरों में बदलाव हुआ है।
भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन, धार, बुरहानपुर और पीथमपुर जैसे बड़े शहरों में नए CSP और SP की पदस्थापना की गई है। इसके अलावा मुरैना, शिवपुरी, अलीराजपुर, मंदसौर, सिवनी, दमोह, सागर, रीवा, नर्मदापुरम, छिंदवाड़ा, बैतूल, नीमच, बड़वानी, धार और सिंगरौली जैसे सुनियोजित जिले भी इस तबादला सूची में शामिल हैं। इस प्रक्रिया में पुलिस विभाग ने अधिकारियों की क्षमता के अनुसार जिम्मेदारी बांटते हुए बेहतर कानून व्यवस्था बनाए रखने का प्रयास किया है।
बालाघाट हॉक फोर्स की महत्वपूर्ण तैनाती
बालाघाट स्थित नक्सल विरोधी विशेष विंग ‘हॉक फोर्स’ में डीएसपी स्तर के 18 अधिकारियों को सहायक सेनानी के पद पर तैनात किया गया है। इसमें उदित मिश्रा, अभिलाष कुमार भलावी, आकाश अमलकर, रवि सोनेर, उमेश प्रजापति, रितेश कुमार शिव, रविंद्र सिंह राठी, आयुष कुमार, सचिन पटेल, कुंदन मंडलोई, राहुल कुमार सय्याम, अक्षय चौधरी, अतुल कुमार सोनी, अमन मिश्रा, रोहित राठौर और राकेश आर्य शामिल हैं। यह तैनाती राज्य में नक्सलियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए की गई है।
चार नए एसडीओपी की नियुक्ति
बालाघाट जिले में भी पुलिस अधीक्षक ने चार नए अनुविभागीय अधिकारियों की नियुक्ति की है। दीपक तोमर को एसडीओपी लांजी, चंद्रशेखर पांडे को एसडीओपी बैहर और अभिषेक गौतम को एसडीओपी परसवाड़ा का अतिरिक्त दायित्व सौंपा गया है। ये नियुक्तियां क्षेत्रीय सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और अपराध नियंत्रण में प्रभावी योगदान देने के उद्देश्य से की गई हैं।
गृह विभाग ने निर्देश दिए हैं कि सभी अधिकारी जल्द से जल्द अपनी नई जिम्मेदारी ग्रहण कर कानून व्यवस्था बनाए रखने में तत्पर रहें। विभाग का कहना है कि ये तबादले आगामी नए आदेश तक प्रभावी रहेंगे और प्रदेश में निरंतर कानून व्यवस्था बनाए रखना प्राथमिकता है।
इस बड़े पुलिस अधिकारियों के तबादले के माध्यम से मध्य प्रदेश सरकार ने पुलिस बल को और भी ज्यादा चुस्त-दुरुस्त बनाने की योजना बनाई है ताकि नागरिकों का विश्वास बढ़े और राज्य में कानून का शासन कड़े रूप में स्थापित हो सके।

