एकनाथ शिंदे को मुख्यमंत्री बनाए जाने पर बच्चू कडू का विवादित बयान

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    शिवसेना के विधायक बच्चू कडू ने राजनीतिक बयानबाजी के नए सुर लगाए हैं। उन्होंने हाल ही में भंडारा में भाजपा और मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस की कड़ी आलोचना की है। अपने भाषण में बच्चू कडू ने शेतकऱ्यांच्या आत्महत्याओं का मुद्दा उठाते हुए सरकार की नीतियों पर सवाल खड़ा किया। उन्होंने कहा कि यदि किसानों की कर्जमाफी में धोखा हुआ तो वे इसके खिलाफ पूरी तरह खड़े होंगे।

    “यहाँ का विदर्भ इलाके का समर्थन एकनाथ शिंदे को मुख्यमंत्री बनाने में निर्णायक होगा”

    बच्चू कडू ने एकनाथ शिंदे को फिर से मुख्यमंत्री बनाने की अपनी इच्छा को भी व्यक्त किया। उनका मानना है कि महाराष्ट्र का मुख्यमंत्री अपने ही दल से होना चाहिए और हर शिवसैनिक की यह इच्छा स्वाभाविक है। उन्होंने कहा, “देवेंद्र फड़नवीस को बढ़ावा मिले और नेतृत्व एकनाथ शिंदे के पास आए।” उन्होंने पिछले 15 से 20 दिनों से विदर्भ के गांव-गांव में जाकर जनता से संवाद किया है और चार दिनों में 20 सभाएँ आयोजित की हैं। बच्चू कडू ने इस बातचीत के दौरान साफ किया कि विदर्भ की जनता एकनाथ शिंदे को मुख्यमंत्री पद तक पहुंचाएगी।

    “कर्जमाफी में उपेक्षा, वित्तीय बोझ बर्दाश्त नहीं”

    अमरावती में आयोजित पत्रकार वार्ता में बच्चू कडू ने कहा कि किसानों की कर्जमाफी संबंधी सरकार को कड़ी आलोचना झेलनी पड़ रही है। उन्होंने कहा कि सरकार ने कर्जमाफी की घोषणा से मुकरने की कोशिश की, लेकिन किसान और संगठन के दबाव में तारीख घोषित करनी पड़ी। उन्होंने बताया कि 2 लाख तक कर्जमाफी की योजना है, लेकिन जिनके पास 3 लाख या उससे अधिक कर्ज है, उन्हें राहत नहीं मिलेगी। बच्चू कडू ने विशेष रूप से OTS (वन टाइम सेटलेमेंट) योजना का जिक्र करते हुए कहा कि इसमें 50 हजार का कर्ज है और ब्याज दो लाख से अधिक हो चुका है। उन्होंने मुख्यमंत्री से अपील की कि महात्मा फुले जैसे किसानों को बख्शा जाए और सभी किसानों को प्रोत्साहन निधि दी जाए।

    उन्होंने यह भी कहा कि जब तक हमें हमीभाव नहीं मिलेगा तब तक प्रोत्साहन निधि जारी रहनी चाहिए। पिछले कर्जमाफी के बावजूद कई किसान इसका लाभ नहीं उठा पाए हैं और प्रोत्साहन निधि मिलने में भी बाधाएँ हैं। इसके अलावा उन्होंने दिव्यांगों की सम्पूर्ण कर्जमाफी की भी मांग की। बच्चू कडू ने स्पष्ट किया कि वह शिवसेना के सच्चे सदस्य हैं, लेकिन उनके लिए किसानों और दिव्यांगों की भलाई पहले है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो वे जल्द ही नये आंदोलन की घोषणा करेंगे।

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