कानपुर में आईटीबीपी जवान की मां के हाथ कटने मामले की जांच कुछ बिंदुओं पर फिर से होगी

Rashtrabaan

    कानपुर। उत्तर प्रदेश के कानपुर में आईटीबीपी के एक जवान की मां के इलाज में हुई कथित लापरवाही के मामले में जांच को लेकर महत्वपूर्ण अपडेट सामने आया है। जवान विकास सिंह की मां के हाथ काटने से जुड़ा यह विवाद स्वास्थ्य विभाग और अर्धसैनिक बल के अधिकारियों के बीच चर्चा में है।

    घटना की पूरी पड़ताल करने के लिए पुलिस कमिश्नर कार्यालय में आईटीबीपी के जवान और उनके वरिष्ठ अधिकारी पहुंचे। जवानों ने अस्पताल की ओर से लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है, जिसके बाद मामले की गंभीरता से जांच शुरू हुई है। इस बीच मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) डॉ. हरिदत्त नेमी से भी इस प्रकरण में पुनः स्पष्ट और विस्तारपूर्ण रिपोर्ट मांगी गई है।

    एडिशनल पुलिस कमिश्नर विपिन ताडा ने पुलिस कमिश्नर कार्यालय परिसर पर जवानों के घेराव की खबरों का खंडन करते हुए बताया कि जवान केवल बातचीत के लिए अपने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ आए थे, और उनके साथी बाहर खड़े थे। इसी दौरान पुलिस ने सभी से मामला समझा और जवानों को वापस भेज दिया गया। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जांच निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होगी, और यदि कोई लापरवाही पाई गई तो संबंधित पक्ष के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    विकास सिंह ने बताया कि उनकी मां निर्मला देवी को सांस लेने में दिक्कत थी और उन्हें कब्ज़ व कमजोरी भी थी। प्रारंभ में उनका इलाज आईटीबीपी अस्पताल महाराजपुर में हुआ, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें एक बड़े निजी अस्पताल के लिए रीफर किया गया था। इस दौरान मां को वेंटिलेटर पर रखा गया। विकास ने आरोप लगाया कि अस्पताल में इलाज के दौरान गलत इंजेक्शन से उनके मां के हाथ में सूजन एवं कालापन बढ़ा, जो बाद में जानलेवा साबित हुआ और अंततः उन्हें बिठूर रोड के एक अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा, जहां उनका हाथ काटना पड़ा।

    इस पूरे मामले में मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने कहा है कि जांच रिपोर्ट में जिन बिंदुओं पर सवाल उठाए गए हैं, उन पर पुनः जांच की जाएगी। जांच के बाद ही अंतिम रिपोर्ट तैयार कर उचित कार्रवाई की जाएगी। आईटीबीपी कानपुर के कमांडेंट गौरव प्रसाद ने भी कहा कि जवानों का मकसद केवल जांच रिपोर्ट पर बात करना था न कि कोई प्रदर्शन या घेराव। उन्होंने पुलिस की पूरी सहयोगी भूमिका की सराहना की।

    यह मामला स्वास्थ्य सेवा व्यवस्था, अस्पतालों की जिम्मेदारी और उत्कृष्ट चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर सवाल उठाता है। प्रशासन ने साफ किया है कि वे मामले की गंभीरता को समझते हुए निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करेंगे ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएँ दोबारा न हों।

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