लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नागरिकों से अपील की है कि वे जल संरक्षण और पर्यावरण की सुरक्षा के प्रति सजग रहें। उन्होंने कहा कि प्रकृति, जलस्रोतों और वन क्षेत्र को नुक्सान पहुंचाने वाले भूमाफिया, वन माफिया, खनन माफिया और स्मगलरों के खिलाफ कड़े कदम उठाना जरूरी है। उनका कहना है कि हर सजग नागरिक का दायित्व है कि वे अपनी मातृभूमि के प्रति अपना फर्ज निभाएं और ऐसे लोगों को रोके जो जल व प्रकृति के संसाधनों को नुकसान पहुंचा रहे हैं।
मुख्यमंत्री योगी ने विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर प्रदेशवासियों को पांच विशेष संकल्प दिलाए। इनमें शामिल था एक पेड़ मां के नाम लगाना, पेड़ों की सुरक्षा करना, जल संरक्षण करना, सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग न करना तथा प्रकृति के अनुरूप जीवनशैली अपनाना। उन्होंने इसमें विशेष रूप से कहा कि कोई टोंटी चोरी कर रहा हो या पानी व्यर्थ बहा रहा हो तो ऐसे लोगों को तुरंत टोका जाए एवं जल संरक्षण को जीवन का हिस्सा बनाया जाए। पानी की हर बूंद कीमती है और इसे व्यर्थ खर्च न होने दें।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में ‘उत्तर प्रदेश में जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का समाधान’ विषयक संगोष्ठी का उद्घाटन किया। इस कार्यक्रम में उन्होंने प्रदर्शनी का अवलोकन किया, बच्चों को चॉकलेट देते हुए पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। बच्चों के साथ उन्होंने सेल्फी ली और वृक्ष कलश में जल अर्पित किया।
अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि जल है तो जीवन है, वन है तो जीवन-चक्र पूरी तरह से स्वस्थ रहता है। परंतु हमने पर्यावरण की उपेक्षा की है जिसके परिणामस्वरूप वर्तमान में जल संकट, अतिवृष्टि, अनावृष्टि और कृषि प्रभावित हो रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि मौसम चक्र में बदलाव के कारण किसानों की आय प्रभावित हो सकती है और खाद्यान्न संकट खड़ा हो सकता है। इसलिए पर्यावरण संरक्षण हमारा पहला कर्तव्य है।
सीएम योगी ने कहा कि हमारे पूर्वज और ऋषि-मुनीयों ने हमें पर्यावरण के प्रति सजग होने का संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि हमें धरती माता और मातृभूमि के प्रति अपने कर्तव्यों को निभाना होगा क्योंकि मां और जन्मभूमि स्वर्ग से भी ऊपर हैं। उन्होंने रामायण में भगवान राम के शब्दों ‘जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी’ का उल्लेख कर सभी को जीवन और प्रकृति के प्रति जागरूक बनने की प्रेरणा दी।
मुख्यमंत्री ने पर्यावरण में होने वाले प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन एवं जल संकट को गंभीर चुनौती बताया और भारत की संस्कृति व पुरातन ग्रंथों में पर्यावरण संरक्षण के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि किसान मित्र के रूप में सर्प का महत्व भी हमारी पौराणिक परंपरा में है। उन्होंने कहा कि आज के दौर में हमें प्रकृति से सामंजस्य बिठाकर जीवन जीना होगा।
उन्होंने कुकरैल वन क्षेत्र का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां का तापमान लखनऊ से कुछ अधिक ठंडा रहता है, जिससे यह क्षेत्र प्राकृतिक समृद्धि का प्रतीक है। अवैध कब्जों को हटाकर इस क्षेत्र को सरंक्षण दिया गया है, और ‘सौमित्र वन’ स्थापित हुआ है जो प्राकृतिक सौंदर्य को और बढ़ाता है।
योगी आदित्यनाथ ने विश्व पर्यावरण दिवस 2026 की थीम ‘इंस्पायर्ड बाय नेचर फॉर क्लाइमेट फॉर अवर फ्यूचर’ पर जोर देते हुए कहा कि स्वच्छ वायु, निर्मल जल, उपजाऊ भूमि और हरित वन मानव जीवन के आधार हैं। तभी हम एक सुरक्षित और स्वच्छ भविष्य की ओर बढ़ सकते हैं। जल जीवन मिशन के तहत घर-घर जल सुविधा उपलब्ध कराई गई है। साथ ही उन्होंने ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान का पांच करोड़ पौधों के साथ प्रदेश में उत्साहपूर्ण पालन होने की जानकारी दी। जुलाई में एक दिवसीय पौधरोपण महाभियान का भी उन्होंने ऐलान किया।
सीएम ने जल संरक्षण के लिए तालाबों, पोखरों, कुओं और बावड़ी को संरक्षित करने के महत्व पर बल दिया और ग्राम प्रधानों तथा नगर निकायों की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि तालों के संरक्षण से जल संकट कम होगा तथा पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित होगी। उन्होंने गोरखपुर और श्रावस्ती में व्यापक संरक्षण कार्यों का उदाहरण प्रस्तुत किया जो पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रेरणादायी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश में तेजी से विकास के बावजूद वन कवर बढ़ाने में सफलता मिली है। पिछले नौ वर्षों में 242 करोड़ पौधे लगाए गए हैं। उन्होंने तनावपूर्ण जलवायु, प्रदूषण और जैव विविधता क्षरण की समस्या को चुनौती माना और लोगों से आग्रह किया कि वे व्यक्तिगत रूप से पर्यावरण संरक्षण के लिए कदम उठाएं।
इस अवसर पर वन राज्यमंत्री डॉ. अरुण कुमार सक्सेना, केपी मलिक, प्रमुख सचिव (वन) वी हेकाली झिमोमी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष आरपी सिंह, वन संरक्षक सुनील चौधरी एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। मुख्यमंत्री योगी की यह अपील न केवल पर्यावरण की सुरक्षा के लिए बल्कि जल संरक्षण की दिशा में जनता को जागरूक करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

