सुरगुजा जिले में हाल ही में एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है जिसमें एक महिला को अपनी 90 वर्षीय सास को पीठ पर लादकर बैंक तक लेकर जाते देखा गया। यह वीडियो बुजुर्ग पेंशनभोगियों को मिलने वाली सरकारी सुविधाओं में आ रही समस्याओं को उजागर करता है और इस मुद्दे पर व्यापक आक्रोश भी उत्पन्न कर रहा है।
सुखमनिया नाम की यह महिला मैनपाट विकास ब्लॉक के जंगलपारा गांव की निवासी है। उन्होंने बताया कि बैंक अधिकारियों द्वारा वेतन के लिए आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने हेतु उन्हें स्वयं बुजुर्ग महिला को लेकर बैंक जाना पड़ रहा था। इस वजह से उन्हें अपने 90 वर्षीय सास को करीब तीन किलोमीटर दूर ट्रेन और वाहन न मिलने के कारण पीठ पर लादकर बैंक तक पैदल लेकर जाना पड़ा।
सुखमनिया ने बताया कि उन्होंने कई बार पेंशन लेने की कोशिश की लेकिन सास की केवाईसी प्रक्रियाIncomplete रहने के कारण भुगतान रुका हुआ था। बैंक अधिकारियों ने स्पष्ट कहा कि Verification के लिए बुजुर्ग को स्वयं उपस्थित होना होगा। इस वजह से महिला को कठिन गर्मी में यह चुनौतीपूर्ण कार्य करना पड़ा।
यह घटना मैनपाट इलाके में बुधवार को हुई। इस दौरान राहगीरों ने इसे कैमरे में रिकॉर्ड किया, जो बाद में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर व्यापक रूप से साझा किया गया। वीडियो में महिला की वेदना और संघर्ष स्पष्ट नजर आता है, जिसके चलते इंटरनेट उपयोगकर्ता इस स्थिति पर गहरा आक्रोश और चिंता प्रकट कर रहे हैं।
लोग ये सवाल उठा रहे हैं कि डिजिटल इंडिया और कल्याणकारी योजनाओं के दावों के बावजूद, दूरस्थ और पिछड़े क्षेत्रों में बुजुर्गों को इस प्रकार का दर्दनाक संघर्ष क्यों सहना पड़ता है। कई बुजुर्ग अपाहिज या शारीरिक रूप से कमजोर होते हैं, उनके लिए ऐसी बाधाएं व्यवस्था में कितनी न्यायसंगत हैं, इस पर भी चर्चा हो रही है।
सुखमनिया अपनी सास की पेंशन की मदद से परिवार का गुजारा करती हैं। उन्होंने बताया कि पेंशन रुकी रहने से उनके परिवार को आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था, इसलिए इस जोखिम भरे कदम को उठाना उनके लिए आवश्यक था।
यह मामला छत्तीसगढ़ के सरकारी तंत्र में कल्याणकारी योजनाओं की व्यवहारिक कठिनाइयों और उनके क्रियान्वयन में सुधार की आवश्यकता को दर्शाता है। आवश्यक है कि बुजुर्ग और असमर्थ लोगों के लिए अधिक सुविधाजनक और संवेदनशील व्यवस्था तैयार की जाए ताकि उन्हें ऐसी कठिनाइयों का सामना न करना पड़े।
सरकार और बैंक के अधिकारियों से भी उम्मीद की जाती है कि वे इस वीडियो को गंभीरता से लेते हुए अपनी प्रक्रियाओं में अधिक लचीलापन और सहानुभूति लाएं, ताकि बुजुर्गों को उनकी पेंशन और अन्य सुविधाएं आसानी से उपलब्ध हो सकें।
यह घटना न केवल एक व्यक्तिगत संघर्ष की कहानी है, बल्कि सामाजिक सुधार और सरकारी कल्याण प्रणाली की भी एक जरुरी चुनौती प्रस्तुत करती है।

