मुंबई। शिवसेना के प्रवक्ता संजय निरुपम ने हाल ही में टीएमसी विधायकों की बैठक में कम उपस्थिति को लेकर तीखा बयान दिया है। उनका तर्क है कि इस घटना से पार्टी के अंदरूनी मतभेद और नाराजगी का स्पष्ट पता चलता है। उन्होंने कहा कि जब ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी पर हमला हुआ, तब पार्टी की एकजुटता दिखाने के लिए विधायक बैठक में आने से मूझल थे। उनका यह नजरिया पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर गहरे संकट को उजागर करता है।
निरुपम ने साथ ही केंद्र सरकार द्वारा “वंदे मातरम” के पूरे गायन को राष्ट्रीय गीत का दर्जा दिए जाने के फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कांग्रेस की तुष्टीकरण राजनीति की भी आलोचना की, जिसमें कहा गया कि कांग्रेस मुसलमानों के वोट बैंक को देखकर कभी “वंदे मातरम” के पूरे संस्करण को मान्यता नहीं देती थी। इसके विपरीत, उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार देशभक्ति से जुड़ी नीतियों को दृढ़ता से लागू कर रही है, जो भारत के हित में है। जो भी इस फैसले के विरुद्ध बोलेंगे, वे भारत विरोधी की भूमिका निभा रहे हैं।
उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले इंडिया गठबंधन के अंदर भी सीट बंटवारे को लेकर निरुपम ने तनाव की संभावना व्यक्त की। उनका मानना है कि कांग्रेस का उत्तर प्रदेश में अस्तित्व समाप्त होने के कगार पर है। अगर कांग्रेस दोबारा मजबूत होना चाहती है तो केवल समाजवादी पार्टी के सहारे ही खड़ी हो सकती है क्योंकि वह यूपी की मुख्य विपक्षी पार्टी है और अधिक सीटों पर दावा करेगी। इसलिए गठबंधन में सीटों को लेकर संघर्ष अधिक बढ़ेगा।
संजय निरुपम के अनुसार, चाहे गठबंधन में कितने भी सीटों का वितरण हो, अंततः उत्तर प्रदेश में सरकार एनडीए की ही बनेगी। उन्होंने योगी आदित्यनाथ की सरकार की कार्यप्रणाली को भी सराहा, जो कानून व्यवस्था स्थापित करने और माफिया राज खत्म करने में सफल रही है। इस वजह से जनता जाति-पात से ऊपर उठकर एनडीए को वोट देगी।
वायु सेना के सशक्तिकरण के मामले में निरुपम ने भारत के अतिरिक्त राफेल विमानों की खरीद को भी समर्थन दिया। उन्होंने कहा कि भविष्य में हवाई युद्ध अधिक होने की संभावना है, इसलिए एयरफोर्स की ताकत बढ़ाना आवश्यक है। ऑपरेशन सिंदूर और ड्रोन हमलों में भारतीय सेना के प्रयासों का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि भारत ने अपनी वायु सीमा की सुरक्षा के लिए और राफेल विमानों की मांग फ्रांस सरकार को भेजी है, जिससे एयरफोर्स की क्षमता और बढ़ेगी।
निरुपम के इन बयानों से राजनीतिक मैदान में टीएमसी की कमजोरी और भाजपा तथा उसके सहयोगी दलों का बढ़ता दबदबा साफ झलकता है। हालांकि, टीएमसी के भीतर के मतभेद और विधायकों की नाराजगी पार्टी की एकजुटता के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। ऐसे हालात में राजनीतिक समीकरण आने वाले चुनावों में और निखर सकते हैं।

