भोपाल में ट्विशा शर्मा की मौत से जुड़ा मामला देशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है। कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच एम्स भोपाल में उनके शव का दूसरी बार पोस्टमार्टम चल रहा है। यह कार्रवाई एम्स दिल्ली की एक उच्च-स्तरीय फोरेंसिक टीम द्वारा की जा रही है, जो मध्य प्रदेश सरकार की विशेष अनुमति से शनिवार शाम हेलीकॉप्टर द्वारा भोपाल पहुंची थी।
इस प्रक्रिया का नेतृत्व फोरेंसिक मेडिसिन विभाग के प्रमुख डॉ. सुधीर गुप्ता कर रहे हैं। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के आदेशानुसार एम्स दिल्ली के निदेशक की देखरेख में बनने वाले चार-सदस्यीय मेडिकल बोर्ड द्वारा शव की पुनः जांच की जा रही है। पोस्टमार्टम के हर चरण की वीडियोग्राफी भी की जा रही है ताकि जांच प्रक्रिया पारदर्शी रहे।
ट्विशा शर्मा मूल रूप से उत्तर प्रदेश के नोएडा की निवासी थीं तथा 12 मई को भोपाल के कटारा हिल्स इलाके में अपने ससुराल में फंदे से लटकी हुई मिली थीं। उनकी शादी लगभग पांच महीने पहले वकील समर्थ सिंह से हुई थी। परिवार ने शिकायत की है कि समर्थ सिंह और उनकी माँ गिरिबाला सिंह ने ट्विशा को दहेज प्रथा के तहत प्रताड़ित किया। परिजन आरोप लगाते हैं कि यह प्रताड़ना गंभीर थी और उसकी वजह से उनके साथ अन्याय हुआ। उन्होंने शव का दूसरी बार पोस्टमार्टम कराने की मांग की थी।
फरार चल रहे समर्थ सिंह ने हाल ही में आत्मसमर्पण किया है। पुलिस ने उन्हें सात दिनों के लिए रिमांड पर ले लिया है और मामले की गहनता से जांच कर रही है। समर्थ की मां की भूमिका भी जांच के दायरे में है।
उच्चतम न्यायालय ने इस मामले को स्वतः संज्ञान में लिया है और इसे ‘ससुराल में हुई अप्राकृतिक मौतों के मामलों में कथित पक्षपात और प्रक्रियागत विसंगतियों’ के शीर्षक तले रखा है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ 25 मई को सुनवाई करेगी।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस दूसरी पोस्टमार्टम की रिपोर्ट मृतिका ट्विशा की मौत के कारणों को स्पष्ट करने में निर्णायक भूमिका निभाएगी कि यह आत्महत्या थी या हत्या। मध्य प्रदेश सरकार ने जांच में पूरा सहयोग देने का भरोसा दिया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने विश्वास व्यक्त किया है कि निष्पक्ष जांच के जरिए सच्चाई उजागर होगी और न्याय मिलेगा।

