नीट परीक्षा और एनटीए की कार्यप्रणाली पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी: आनंद दुबे ने की सराहना

Rashtrabaan

    मुंबई। शिवसेना (यूबीटी) के नेता आनंद दुबे ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) की कार्यप्रणाली, नीट परीक्षा, और अन्य संवेदनशील विषयों पर अपने विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की हालिया टिप्पणियों का स्वागत करते हुए एनटीए के सुधार की आवश्यकता पर ज़ोर दिया।

    दुबे ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने जो सुझाव दिया है, उससे एनटीए को संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से सीखने का मौका मिलेगा। यूपीएससी की परीक्षाएं वर्षों से बहुत विश्वसनीय मानी जाती हैं और उनमे पेपर लीक जैसी समस्याएं बेहद कम होती हैं। इसके विपरीत, नीट और अन्य परीक्षा संबंधी मामलों में हाल के वर्षों में पेपर लीक की घटनाओं ने छात्रों का भरोसा कमजोर किया है।

    उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि एनटीए की कार्यप्रणाली में कहीं न कहीं लापरवाही हुई है, जिसके कारण सुप्रीम कोर्ट को फटकार लगानी पड़ी। दुबे ने उम्मीद जताई कि अब एनटीए में आवश्यक सुधार होंगे जिससे परीक्षाओं की विश्वसनीयता वापस लौटेगी और छात्रों का विश्वास बहाल होगा।

    केरल में ‘वंदे मातरम’ को लेकर विवादों पर प्रतिक्रिया देते हुए दुबे ने कहा कि राष्ट्रगीत का पूरा सम्मान होना चाहिए और यदि इसका गायन किया जाता है तो उसे सही ढंग से ही किया जाना चाहिए। उन्होंने यह कहना जरूरी बताया कि जो लोग राष्ट्रगीत के शब्द या धुन से परिचित नहीं हैं, उन्हें इसे सीखना चाहिए। उन्होंने कांग्रेस पर भी इस विषय को गंभीरता से लेने का आग्रह किया क्योंकि स्वतंत्रता संग्राम के दौरान कांग्रेस के अनेक वरिष्ठ नेता ‘वंदे मातरम’ का सम्मान करते थे।

    मराठा आरक्षण आंदोलन के संदर्भ में, दुबे ने कहा कि महाराष्ट्र सरकार और आंदोलनकारी नेताओं के बीच संवाद बेहद आवश्यक है। उन्होंने उल्लेख किया कि मनोज जरांगे कई वर्षों से मराठा समाज के आरक्षण की मांग को लेकर सक्रिय हैं और सरकार के साथ बातचीत के जरिये कई बार आंदोलन को स्थगित भी किया जा चुका है। उन्होंने सुझाव दिया कि मुख्यमंत्री और मनोज जरांगे को मिलकर स्थायी समाधान निकालना चाहिए जिससे समाज में शांति बनी रहे।

    आंध्र प्रदेश कांग्रेस के नेता वाईएस शर्मिला की संभावित राज्यसभा सदस्यता के विषय में भी आनंद दुबे ने सकारात्मक टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि शर्मिला का प्रदेश की राजनीति में प्रभाव है और यदि वह कांग्रेस के लिए राष्ट्रीय स्तर पर काम करना चाहती हैं तो यह पार्टी के लिए लाभकारी होगा। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्यसभा उम्मीदवारों का चयन पूरी तरह से पार्टी का आंतरिक मामला है और अंतिम निर्णय नेतृत्व को लेना है।

    डेयरी उत्पादों पर हलाल सर्टिफिकेशन को लेकर चल रही बहस में दुबे ने संतुलित दृष्टिकोण अपनाने की बात कही। उन्होंने बताया कि खाड़ी देशों और अन्य मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में हलाल प्रमाणन का व्यावसायिक महत्व है, जिससे वहां निर्यात में सहायता मिलती है। वहीं भारत में इसके प्रति विभिन्न समुदायों में अलग-अलग दृष्टिकोण हैं और भावनाएं जुड़ी हुई हैं। उन्होंने कहा कि यदि कोई कंपनी विदेशी बाजारों की आवश्यकताओं को ध्यान में रख कर हलाल सर्टिफिकेशन प्राप्त करती है तो इसे उपभोक्ताओं को स्पष्ट रूप से बताना चाहिए।

    दुबे ने इस विषय पर सभी समुदायों की भावनाओं और विश्वासों का सम्मान करने की आवश्यकता पर बल दिया और कहा कि विवादों का समाधान संवाद, पारदर्शिता और समझदारी से ही निकल सकता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस प्रकार के संवेदनशील मुद्दों पर सभी पक्ष मिलकर सकारात्मक पहल करेंगे।

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