थेनी जिले के ग्रामीणों ने फिल्म निर्देशक भरथिराजा के साथ अपने संबंधों को याद किया और बताया कि वह एक दयालु और स्नेही व्यक्ति थे। उन्होंने कहा कि भरथिराजा हर किसी को नाम से बुलाते थे और बच्चों की शिक्षा में हमेशा मदद करते थे।
ग्रामीणों ने साझा किया कि भरथिराजा का व्यवहार बेहद सरल और मिलनसार था। वे न केवल फिल्म जगत में एक प्रतिष्ठित नाम थे, बल्कि स्थानीय समुदाय के लिए भी एक प्रेरणास्रोत थे। बच्चों की पढ़ाई-लिखाई में उनका योगदान सराहनीय था। वे हमेशा यह सुनिश्चित करते थे कि गांव के छात्र अपने सपनों को पूरा कर सकें और शिक्षा से वंचित न रहें।
भरथिराजा की कथित तौर पर ग्रामीण जीवन और उनकी कला के बीच गहरी जुड़ाव थी। उनका मानना था कि सच्ची कला वही होती है जो जीवन के हर पहलू को दर्शाए, और यही सोच उन्होंने अपनी फिल्मों में भी प्रस्तुत की।
ग्रामीणों ने यह भी कहा कि भरथिराजा ने कई बार व्यक्तिगत रूप से बच्चों को स्कूल की फीस दिलवाई और उन्हें पढ़ाई के लिए जरूरी संसाधन मुहैया करवाए। उनका यह व्यवहार गांव के लिए एक बड़ी नियामत के समान था, जिससे स्थानीय युवाओं को शिक्षा की राह में सहायता मिली।
उनकी दयालुता और समाज के प्रति समर्पण ने उन्हें मात्र एक फिल्म निर्देशक के रूप में ही नहीं बल्कि एक आदर्श नागरिक के रूप में भी स्थापित किया। ग्रामीणों का कहना है कि उनका जाना गांव के लिए एक अपूरणीय क्षति है, लेकिन उनकी शिक्षाएं और काम सदैव याद रखे जाएंगे।
भरथिराजा के इस क़दम ने यह साबित कर दिया कि एक सफल व्यक्ति कैसे समाज के लिए योगदान दे सकता है और दूसरों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकता है। उनकी यादें और आदर्श आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बने रहेंगे।

