नफरत की राजनीति का आरोप: भाजपा-विहिप-बजरंग दल पर वारिस पठान का तीखा हमला
मुंबई। बकरीद के पर्व से पहले मुंबई में उठे विवाद और बीएमसी द्वारा कुछ इलाकों में कुर्बानी पर लगाए गए प्रतिबंधों के बीच एआईएमआईएम नेता वारिस पठान ने कड़ा विरोध जताया है। उनका आरोप है कि भाजपा, विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल सहित कुछ राजनीतिक संगठनों द्वारा जानबूझकर मुस्लिम त्योहारों को निशाना बनाया जा रहा है ताकि समाज में तनाव पैदा किया जा सके।
वारिस पठान ने बताया कि कई सोसायटियों में कुछ लोगों द्वारा दबाव बनाकर कुर्बानी की अनुमति रद्द करवाई गई है। उन्होंने कहा कि इन संगठनों के लोग सोसायटियों में जाकर गलत तरीके से जांच कर रहे हैं कि कहीं कोई बकरा तो नहीं रखा गया है। यह न केवल व्यक्तिगत स्वतंत्रता का हनन है, बल्कि धार्मिक स्वतंत्रता पर भी हमला है।
उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर ऐसा कौन-सा कानून है जो कुछ लोगों को यह अधिकार देता है कि वे घरों और सोसायटियों में घुसकर ऐसी जांच करें। वारिस ने कहा, “अगर पालतू कुत्ते रखने पर अनुमति है, तो फिर बकरीद के लिए जानवर रखने पर क्यों आपत्ति जताई जा रही है? यह पूरी कोशिश मुसलमानों के धार्मिक त्योहारों को बाधित करने और नफरत बढ़ाने की साजिश है।”
उन्होंने कहा कि वर्षो से मुंबई के लोग मिल-जुल कर अपने त्योहार मनाते आए हैं और इस बार अचानक विरोध की यह लहर उठना स्वाभाविक नहीं, बल्कि संगठित नफरत का परिणाम है। वारिस पठान ने यह भी कहा कि पिछले कई दशक से जिन सोसायटियों में कुर्बानी होती रही, वहां इस बार अचानक प्रतिबंध लगा दिया गया।
बकरीद पर अपने कार्यक्रम के बारे में वारिस ने बताया कि वह सुबह ईदगाह में नमाज पढ़ेंगे, एक-दूसरे से गले मिलेंगे और फिर कुर्बानी की रस्म निभाएंगे। उन्होंने मुस्लिम धर्मगुरुओं से अपील की कि कुर्बानी के पशुओं की तस्वीरें सोशल मीडिया पर न डालें ताकि किसी की धार्मिक भावनाएं आहत न हों। उनका मानना है कि मुसलमान हमेशा शांति और भाईचारे का संदेश देते आए हैं और आगे भी देंगे।
इसके अतिरिक्त, वारिस पठान ने विश्व के अन्य हिस्सों जैसे फिलिस्तीन और गाजा में जारी हिंसा का जिक्र करते हुए बकरीद के मौके पर वहां के लोगों के लिए दुआ मांगने की बात कही। उन्होंने उम्मीद जताई कि जल्द ही पूरे विश्व में शांति कायम हो।
ताजमहल में कथित कीर्तन और भजनों के वायरल वीडियो पर भी उन्होंने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सवाल किया कि अगर वहां भजन-कीर्तन हो सकता है, तो मुसलमानों द्वारा नमाज पढ़े जाने पर विवाद क्यों खड़ा किया जाता है। उनका कहना था कि नियम और कानून सभी वर्गों के लिए समान होने चाहिए, न कि किसी एक समुदाय के प्रति पक्षपात।
वारिस पठान ने यह भी कहा कि सड़क पर भजन-कीर्तन करने पर कोई आपत्ति नहीं करता, परंतु यदि कोई व्यक्ति सड़क पर नमाज पढ़ता है तो तुरंत विवाद खड़ा कर दिया जाता है। उन्होंने इसे समरसता और धार्मिक समानता के विरुद्ध बताया।

