पुणे। आगामी त्योहारों को ध्यान में रखते हुए, पुणे प्रशासन ने शहर में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सार्वजनिक सभाओं पर 14 दिनों का प्रतिबंध लागू कर दिया है। यह प्रतिबंध 16 मई की रात 12:01 बजे से शुरू होकर 8 जून की आधी रात तक प्रभावी रहेगा।
महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम, 1951 की धारा 37 के तहत यह निर्णय लिया गया है, जिसके अंतर्गत इस अवधि में किसी भी प्रकार के मार्च, विरोध प्रदर्शन, रैलियां, जुलूस और सार्वजनिक सभाएं आयोजित करने पर पूरी तरह रोक रहेगी।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी के विरोध में हो रहे विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक समूहों के प्रदर्शन को देखते हुए शांति बनाए रखना है। ऐसे विरोध प्रदर्शनों से कानून-व्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता था, इसलिए सद्भाव बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया गया है।
अधिकारियों ने बताया कि यह प्रतिबंध खास तौर पर बकरीद और आगामी अन्य त्योहारों के दौरान सुरक्षा में कोई कमी न रहे, इसके लिए प्रभावी बनाया गया है। इसके अंतर्गत हथियार, लाठी, पत्थर, विस्फोटक पदार्थ, ज्वलनशील पदार्थ, या किसी प्रकार की नुकसान पहुंचाने वाली वस्तुओं को साथ ले जाने पर भी रोक है।
साथ ही, भड़काऊ नारे लगाना, भड़काऊ भाषण देना, सार्वजनिक घोषणाएं करना, तेज शोरगुल वाली सभाएं करना, पुतले या तस्वीरें जलाना, एवं विवादास्पद पोस्टर या बैनर बांटना जिनसे सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित हो सकती है, इन सभी पर भी प्रतिबंध रहेगा।
पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि इस आदेश का उल्लंघन करने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी, और उनकी ओर से जब्त की गई कोई भी प्रतिबंधित वस्तु तुरंत कब्जे में ली जाएगी।
आवश्यक सेवाएं एवं सामान्य आवागमन पूर्ववत जारी रहेंगे, परन्तु अगले 14 दिनों तक बड़े सार्वजनिक प्रदर्शनों और सभाओं पर कड़ी नजर रखी जाएगी ताकि किसी प्रकार की अप्रिय घटना न घटे।
यह भी ध्यान देने योग्य है कि देशभर में 28 मई को मुस्लिम समुदाय दुर्मुख बकरीद का त्यौहार बड़े उत्साह एवं शांतिपूर्ण तरीके से मनाएंगे, जिसके मद्देनजर यह सुरक्षा इंतजाम बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

