शिरडी। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने ग्रामीण इलाकों में पेट्रोल और डीजल की कमी को स्वीकार करते हुए कहा कि अचानक ईंधन की मांग में 20 से 30 प्रतिशत की वृद्धि के कारण स्थानीय आपूर्ति बाधित हुई है। उन्होंने कृषि कार्यों की आड़ में ईंधन की जमाखोरी और कालाबाजारी को लेकर कड़ी चेतावनी जारी की है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी जिला कलेक्टरों और संभागीय आयुक्तों को निर्देश दिए गए हैं कि वे स्थिति पर बारीकी से नजर रखें और किसानों को डीजल की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करें। उनका कहना है कि कोई भी कदम जिससे कृषि कार्य प्रभावित हो, वह बर्दास्त नहीं किया जाएगा।
फडणवीस ने बताया कि कई ग्रामीण क्षेत्रों में फिलहाल पेट्रोल और डीजल की उपलब्धता सीमित है, जिसकी वजह से जिलाधिकारियों को सख्त आदेश दिए गए हैं ताकि किसानों को जरूरी ईंधन प्रदान किया जा सके।
उन्होंने इस अचानक मांग में वृद्धि को कृत्रिम कमी या प्रणालीगत हेरफेर से जोड़कर देखा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब मांग में अप्रत्याशित वृद्धि होती है तो यह कहीं न कहीं गड़बड़ी की ओर संकेत करता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जमाखोरी या घबराहट में भारी खरीदारी से वास्तविक किसानों को परेशानी नहीं होनी चाहिए।
स्थानीय प्रशासन ने ईंधन की आपूर्ति को नियंत्रित करने के लिए कई उपाय भी शुरू कर दिए हैं। कई जिलों में राशनिंग प्रोटोकॉल लागू कर दिया गया है, जहां डीजल खरीदने वालों के वाहन पंजीकरण प्रमाण पत्र की जाँच की जाती है ताकि थोक मात्रा में ईंधन बेवजह न बिके।
मुख्यमंत्री ने संकेत दिया कि अगर जरूरत पड़ी तो राज्य सरकार अन्य प्रभावित इलाकों में भी इस सत्यापन प्रक्रिया को मजबूत करने पर विचार करेगी ताकि कालाबाजारी और जमाखोरी रोकी जा सके।
यह प्रतिबंध तब आया है जब वैश्विक ऊर्जा संकट के कारण पश्चिम एशिया से तेल की आपूर्ति में अस्थिरता बनी हुई है, जो स्थानीय बाजारों पर भी प्रभाव डाल रही है। इसी वजह से मई के पहले पखवाड़े में ईंधन की भारी कमी और अफरा-तफरी देखी गई थी।
मांग में अचानक आई बढ़ोतरी ने ग्रामीण जिलों के पेट्रोल पंपों पर दबाव बढ़ा दिया है और कई पेट्रोल पंपों पर ईंधन अस्थायी तौर पर खत्म हो चुका है।
इस बीच, राज्य के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री छगन भुजबल ने जनता को आश्वस्त किया है कि महाराष्ट्र में पेट्रोल और डीजल की भरपूर आपूर्ति उपलब्ध है और जल्द ही स्थिति सामान्य हो जाएगी।
मुख्यमंत्री फडणवीस ने सभी संबंधित अधिकारियों से कहा है कि वे ईंधन की सप्लाई उचित रूप से उपलब्ध कराने के लिए सतर्क रहें और किसी भी तरह की गैरकानूनी गतिविधि के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाए। उनका मानना है कि किसान ही इस समस्या से सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं और उनकी हरसंभव मदद सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता होगी।
इस स्थिति में नागरिकों से भी संयम बरतने और केवल आवश्यकतानुसार ही ईंधन की खरीददारी करने की अपील की गई है ताकि आम लोगों को परेशानियों का सामना न करना पड़े।
सरकार का उद्देश्य है कि ईंधन की कालाबाजारी और जमाखोरी को रोकते हुए किसानों और ग्रामीण इलाकों के लोगों को उनकी जरूरत के अनुसार समय पर ईंधन उपलब्ध कराया जाए।

