कोंडागांव। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण नई दिल्ली एवं छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण बिलासपुर के निर्देशानुसार 14 मार्च को नेशनल लोक अदालत का सफल आयोजन किया गया। इस आयोजन में 19 दिसंबर 2024 को हुई वाहन दुर्घटना में मृतक पीड़ित पक्ष को बीमा कंपनी द्वारा मुआवजे के रूप में 1 करोड़ 15 लाख रुपये की राशि अवार्ड स्वरूप प्रदान की गई।
दुर्घटना की गंभीरता और पीड़ित परिवार की आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए न्यायालय ने त्वरित कार्रवाई करते हुए बीमा कंपनी को यह राशि देने का आदेश दिया। इस समझौते में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश विक्रम प्रताप चंद्रा तथा अधिवक्ता प्रशांत दत्ता की सक्रिय भूमिका रही, जिन्होंने बीमा कंपनी के प्रतिनिधियों के साथ मामले का निष्पादन किया। बाद में इस राशि का चेक प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश किरण चतुर्वेदी के समक्ष पीड़ित पक्ष को सौंपा गया।
मुआवजे की यह राशि पीड़ित परिवार की आर्थिक सहायता को ध्यान में रखकर उपलब्ध कराई गई है, जिससे वे दुर्घटना के बाद उठ रही वित्तीय चुनौतियों का सामना बेहतर ढंग से कर सकें। इसके अलावा, न्यायालय ने पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए पीड़ित पक्ष को पौधा भी वितरित किया, जिससे सामाजिक जिम्मेदारी एवं संवेदनशीलता का संदेश दिया गया।
इस आयोजन के जरिए न्याय प्रणाली की तत्परता, सामाजिक न्याय के प्रति प्रतिबद्धता और विधिक सेवा प्राधिकरण की प्रभावशीलता को स्पष्ट रूप से दिखाया गया। विशेषज्ञों के अनुसार, इस प्रकार के कार्यक्रमों से न केवल न्याय प्रक्रिया में तेजी आएगी, बल्कि आम जनता का विश्वास भी बढ़ेगा।
विधिक विशेषज्ञों ने कहा कि वाहन दुर्घटना मामलों में पीड़ितों को उचित मुआवजा दिलाना आवश्यक है ताकि वे अपने जीवन को फिर से पटरी पर ला सकें। इसके लिए न्यायालयों और विधिक सेवा प्राधिकरण दोनों की भूमिका बेहद अहम होती है। कोण्डागांव नेशनल लोक अदालत का यह फैसला अन्य जिलों के लिए एक प्रेरणा स्वरूप है, जो भविष्य में पीड़ितों को न्याय दिलाने में मददगार साबित होगा।
समापन में, यह कहा जा सकता है कि न्यायालय और विधिक सेवा प्राधिकरण ने मिलकर पीड़ितों के अधिकारों की रक्षा करते हुए सामाजिक न्याय को सशक्त किया है और ऐसे उदाहरण से समाज में सकारात्मक बदलाव की संभावना बढ़ी है।

