मैनपुरी। उत्तर प्रदेश में भीषण गर्मी ने बिजली व्यवस्था को चुनौती दे दी है। लगातार बढ़ते तापमान के कारण प्रदेश में बिजली की खपत इतनी बढ़ गई है कि सिस्टम पर दबाव महसूस किया जा रहा है। इस बीच, प्रदेश सरकार के ऊर्जा मंत्री जयवीर सिंह ने बिजली आपूर्ति को निर्बाध बनाए रखने के लिए की जा रही तैयारियों की जानकारी दी है।
जयवीर सिंह ने बताया कि पूरे उत्तर भारत में चल रहे हीटवेव से तापमान 45 से 47 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच रहा है, जिससे बिजली की मांग में अचानक वृद्धि हुई है। मुख्यमंत्री के निर्देशों के अनुसार, सरकार यह सुनिश्चित करने पर लगी है कि कोई भी क्षेत्र बिजली संकट से प्रभावित न हो। उन्होंने कहा कि जहां भी कोई तकनीकी खराबी या सिस्टम फॉल्ट आता है, उसे तुरंत ठीक करने के लिए टीमों को सक्रिय रखा गया है।
मंत्री ने यह भी स्वीकार किया कि कुछ स्थानों पर बिजली आपूर्ति में व्यवधान की घटनाएं सामने आई हैं, जिनका कारण कभी-कभार नीचे के स्तर पर लापरवाही या सिस्टम की कमियां होती हैं। इस पर सरकार ने सख्त कार्रवाई करने की बात कही है और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कदम उठाए जा रहे हैं ताकि भविष्य में ऐसी समस्याएं न हों।
साथ ही उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता है कि किसी भी सूरत में जनता को बिजली संकट का सामना न करना पड़े। यदि गंभीर लापरवाही पाई जाती है तो तत्काल जांच के बाद कार्रवाई की जाती रहेगी।
दूसरी ओर, गोंडा जिले में बढ़ते तापमान की वजह से कई ट्रांसफॉर्मर ओवरहीट हो गए हैं। बिजली विभाग के कर्मचारी ट्रांसफॉर्मरों को ठंडा रखने के लिए पानी के स्प्रे और बड़े पंखों का उपयोग कर रहे हैं ताकि आपूर्ति बाधित न हो।
एक अधिकारी ने बताया कि वर्तमान में बिजली की मांग लगभग 800 मेगावाट तक पहुंच चुकी है, जो सामान्य स्तर से काफी अधिक है। इससे बिजली नेटवर्क पर दबाव बढ़ गया है और ट्रांसफॉर्मर टूटने का खतरा बन गया है। इसलिए, बिजली विभाग की टीमें फील्ड में तैनात हैं और लगातार निगरानी कर रही हैं।
आखिरकार, अधिकारियों ने जनता से भी अपील की है कि वे बिजली उपकरणों का उपयोग सोच-समझकर करें और एक साथ ज्यादा पावर वाले उपकरण न चलाएं ताकि आपूर्ति बाधित न हो। सरकार की यह कोशिश है कि गर्मी के मौसम में किसी भी प्रकार की बिजली समस्या से उपभोक्ताओं को बचाया जा सके।

