लखनऊ : फर्जी दस्तावेज बनाकर करोड़ों की जमीन हड़पने की कोशिश, दो आरोपी गिरफ्तार

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    लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में एक बड़ी जमीन हड़पने की साजिश का पर्दाफाश हुआ है। पुलिस ने फर्जी दस्तावेज तैयार कर करोड़ों रुपये की पैतृक जमीन पर अवैध कब्जा करने की कोशिश करने वाले दो वांछित आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह गिरफ्तारी थाना मोहनलालगंज पुलिस टीम ने की है, जो लंबे समय से आरोपियों की तलाश में जुटी थी।

    यह मामला 11 दिसंबर 2025 को शुरू हुआ जब वादी समीर मिर्जा ने थाना मोहनलालगंज में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी पैतृक भूमि अमेठी गाँव, तहसील मोहनलालगंज में फर्जी दस्तावेज बनाकर उनके दावे के खिलाफ अवैध दावा प्रस्तुत किया गया है। पुलिस ने शिकायत की गंभीरता को देखते हुए मामले की जांच शुरू की।

    जांच में पुलिस को पता चला कि मोहम्मद फरीद मिर्जा नामक व्यक्ति ने खुद को वादी के स्वर्गीय चाचा खुसरू मिर्जा का वारिस बताकर नकली दस्तावेज तैयार करवाए थे। इस प्रक्रिया में उसने अपने असली पारिवारिक संबंधों को छिपाया, फर्जी जन्म एवं मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाकर न्यायालय समेत अन्य सरकारी मंचों पर प्रस्तुत किया। यहां तक कि अपनी जीवित माता का भी निधन दिखाकर फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र हासिल किए गए और उनकी कथित अंत्येष्टि से जुड़े भ्रामक दस्तावेज का प्रयोग किया गया।

    पुलिस की पड़ताल में संबंधित विभागों और अन्य संस्थानों से प्राप्त रिपोर्टों से इसके प्रमाण मिले कि सभी दस्तावेज जाली एवं फर्जी थे। बैंक खातों में धनराशि के लेन-देन के रिकॉर्ड, गवाहों के बयान तथा अन्य साक्ष्यों की मदद से आरोपियों की संलिप्तता स्पष्ट हुई।

    इस मामले में पहले से ही आरोपित मोहम्मद फरीद मिर्जा, मोहम्मद अशफाक मिर्जा उर्फ बाबू मियां और कलीम खान लखनऊ जिला जेल में बंद हैं। वहीं फरार चल रहे फुरकान अहमद अब्बासी (46 वर्ष) और अभिषेक यादव (28 वर्ष) को पुलिस ने कैसरबाग के बारादरी चौराहे के पास दबिश देकर गिरफ्तार कर लिया। दोनों आरोपियों को कोर्ट में पेश किया जाएगा और आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    पुलिस के अधिकारियों ने बताया कि इस तरह के जाली एवं कूटरचित दस्तावेज से जमीन हड़पने के मामलों पर कड़ी नजर रखी जा रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। वे जनता से भी अनुरोध करते हैं कि यदि किसी को ऐसे मामलों की जानकारी हो तो पुलिस को सूचित करें ताकि अवैध गतिविधियों को रोका जा सके।

    यह केस लखनऊ में भू-राजस्व कानूनों के उल्लंघन की ओर警 दिलाता है और बताता है कि अधिकारियों और पुलिस को किस तरह सतर्क रहना पड़ता है। जमीनी सच्चाई एवं कानूनी दस्तावेजों के सत्यापन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा ताकि गलत तरीके से संपत्ति हड़पने वालों को न्याय के कटघरे में लाया जा सके। इस गिरफ्तारी से न्याय व्यवस्था में विश्वास बढ़ेगा और ऐसी गड़बड़ियों पर अंकुश लगेगा।

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