मुंबई। पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के सांसदों पर हुए कथित हमलों को लेकर शिवसेना उद्धव बालासाहेब ठाकरे (यूबीटी) ने राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू करने की मांग उठाई है। शिवसेना की यह मांग पार्टी के मुखपत्र ‘सामना’ के संपादकीय में की गई है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि टीएमसी नेता अभिषेक बनर्जी और कल्याण बनर्जी पर हमला एक संगठित और पूर्व नियोजित साजिश थी।
संपादकीय में कहा गया है कि पश्चिम बंगाल में हाल की घटनाओं ने न केवल राज्य की, बल्कि पूरे देश की प्रतिष्ठा को भी नुकसान पहुंचाया है। इसे एक सभ्य राज्य माना जाता था, लेकिन अब वह हिंसा, घृणा और भीड़तंत्र का केंद्र बन गया है। भाजपा ने विधानसभा चुनाव जीतकर सत्ता प्राप्त की है, परंतु जनता के कल्याण के बजाय वे राजनीतिक प्रतिशोध में लगे हुए हैं।
संपादकीय में यह भी उल्लेख है कि अगर ममता बनर्जी के कार्यकाल में ऐसी हिंसा होती, तो राज्यपाल तत्काल केंद्र सरकार को राष्ट्रपति शासन लागू करने की सिफारिश करते। अभिषेक बनर्जी पर हुए हमले में उन्होंने हेलमेट पहनने की वजह से जान बचाई, जबकि सांसद कल्याण बनर्जी भी इसी किस्म की हिंसा के शिकार हुए। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने इन हमलों से इंकार करते हुए इसे जनाक्रोश बताया, जिसे सामना ने पूरी तरह खारिज किया।
लेख में कहा गया है कि यह हाथ-मुट्ठी की लड़ाई या अचानक गुस्सा नहीं, बल्कि एक सुनियोजित और संगठित गुंडागर्दी है। भाजपा या तो टीएमसी को कमजोर करना चाहती है या बंगाल में स्थायी रूप से गुंडों का राज कायम करना चाहती है। भाजपा की झूठी दलीलों पर सवाल उठाते हुए सामना ने भाजपा शासन में हो रहे हिंसक घटनाक्रमों को बांग्लादेशी घुसपैठियों की जगह गुंडों के कब्जे के रूप में बताया है।
संपादकीय में यह भी कहा गया है कि दो टीएमसी सांसदों को जानबूझकर मौत के घाट उतारने का प्रयास किया गया, लेकिन मुख्यमंत्री और राज्यपाल की चुप्पी इस मामले की गंभीरता को दर्शाती है। यह स्थिति बताती है कि राज्य सरकार अपराधियों को संरक्षण दे रही है और विपक्ष को खत्म करने की नीति पर काम कर रही है।
शिवसेना के संपादकीय ने उल्लेख किया कि पश्चिम बंगाल में ‘‘नव-हिंदुत्व’’ की एक लहर चल रही है, जो लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए खतरा बन सकती है। साथ ही प्रश्न उठाया गया कि जब देश में अनेक गंभीर समस्याएं हैं जैसे परीक्षा प्रश्नपत्र लीक होना, ईंधन की बढ़ती कीमतें, और महंगाई, तो जनता क्यों भाजपा की ओर इतनी बेबस और आश्रित नजर आ रही है।
ठाकरे नेतृत्व वाली शिवसेना ने सरकार से आग्रह किया है कि वह स्पष्ट करे कि असली आर्थिक संकट के बीच जनता की राजनीतिक हिंसा में क्यों उलझ गई है और इसका समाधान कैसे किया जाएगा।
यह विवादजनक स्थिति पश्चिम बंगाल की राजनीतिक स्थिरता और सामाजिक स्वास्थ्य के लिए एक गंभीर चिंता का विषय बनी हुई है, जिसके लिए सभी पक्षों से त्वरित और प्रभावी कदम उठाने की अपेक्षा की जा रही है।

