समुखी सुरेश बताती हैं कि स्टैंड-अप कॉमेडी एक ईमानदार और असहज कबूलनामे की तरह क्यों होनी चाहिए

Rashtrabaan

    स्टैंड-अप कॉमेडी में अपनी अलग छाप छोड़ने वाली समुखी सुरेश ने बताया कि इस कला में असहजता और ईमानदारी कितनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। नेटफ्लिक्स के प्रतिष्ठित “Netflix Is A Joke Fest 2026” में भारत की एकमात्र महिला कॉमेडियन के रूप में मंच साझा करने वाली समुखी ने इस बारे में गहराई से विचार किया।

    समुखी सुरेश केवल एक कॉमेडियन नहीं हैं, बल्कि वे एक प्रख्यात रचनाकार, लेखक और अभिनेता भी हैं। उन्होंने समझाया कि स्टैंड-अप कॉमेडी केवल हँसाने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह अपने अनुभवों और कम्फर्ट जोन से बाहर निकलने का एक तरीका भी है। उन्होंने कहा, “जब आप एक कॉमेडियन के तौर पर असहज महसूस करते हैं, तब ही आप अपनी असली कहानी लोगों के सामने ला पाते हैं। यही असहजता आपके काम को प्रामाणिक बनाती है।”

    समुखी का मानना है कि एक रचनाकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती है अपने तथ्य और भावनाओं को छुपाए बिना प्रस्तुत करना। यही ईमानदारी दर्शकों को कॉमेडी से जोड़े रखती है। उन्होंने अपनी रचनात्मक प्रक्रिया पर चर्चा करते हुए बताया कि कैसे वे खुद को असहज स्थिति में डालती हैं ताकि अपनी कहानी में वह गहराई और प्रामाणिकता लाई जा सके।

    नेटफ्लिक्स के इस फेस्टिवल में हिस्सा लेना उनके लिए एक महत्वपूर्ण माइलस्टोन था, जिसने उन्हें अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर दिया। समुखी ने साझा किया कि इस अनुभव ने उन्हें आत्म-विश्वास तो बढ़ाया ही, साथ ही अभिनय के विविध पहलों को समझने में मदद की।

    उन्होंने कहा, “मेरे लिए स्टैंड-अप कॉमेडी एक ऐसा माध्यम है, जहां मैं अपने अंदर के अभिनेता को खोजती रहती हूं। हर बार जब मैं मंच पर होती हूं, मुझे अपनी असहजताओं का सामना करना पड़ता है और उसी से मेरी प्रतिभा निखरती है।”

    समुखी सुरेश के विचारों से स्पष्ट होता है कि स्टैंड-अप कॉमेडी केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आत्म-खोज, ईमानदारी, और सामाजिक प्रतिबद्धता का संयोजन है। उनके प्रयास और योगदान आने वाले कॉमेडियनों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।

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