लखनऊ। हमीरपुर में बेतवा नदी पर निर्माणाधीन पुल के ढहने की घटना ने एक बार फिर से प्रदेश सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। उत्तर प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष अजय राय ने इस हादसे को केन्द्र सरकार की लापरवाही और भ्रष्टाचार का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि देश में ऐसे हादसे लगातार होते रहते हैं, लेकिन ठेकेदारों और उनकी मनमानी पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती। पीड़ित परिवारों के लिए मुआवजे की मांग के साथ उन्होंने राज्य सरकार की नाकामी पर तीखा हमला किया।
अजय राय ने कहा कि यह कोई पहली घटना नहीं है; इससे पहले वाराणसी में भी पुल गिरने जैसी दर्दनाक घटनाएं हुई हैं। उन्होंने विशेष रूप से कहा कि प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र में हुए हादसे के बाद भी दोषियों के खिलाफ उचित कदम नहीं उठाए गए, सिर्फ इंजीनियरों को जेल भेजा गया जबकि जिम्मेदार ठेकेदार गुमनामी में रहे।
प्रदेश में हमीरपुर के इस हादसे में भी ठेकेदार अभी तक पकड़ में नहीं आया है और कोई गिरफ्तारी नहीं हुई। राय ने गुजरात के ठेकेदारों को प्रोत्साहित कर कमिशनखोरी को जन्म देने वाले तंत्र पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि इससे साफ पता चलता है कि सिस्टम में कितना गहरा भ्रष्टाचार है, जिसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ता है।
उन्होंने पीड़ितों के परिवारों के लिए तत्काल मुआवजे की मांग की और कहा कि मृतकों के परिजनों को एक करोड़ रुपए और घायलों को कम से कम पचास लाख रुपए आर्थिक सहायता मिलनी चाहिए। इसके अलावा उन्होंने प्रदेश के कानून व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल उठाए।
राय ने कहा कि प्रदेश में लगातार बढ़ती हत्याओं और अपराध के प्रति सरकार की लचर रवैये के कारण जनता असुरक्षित महसूस कर रही है। गाजियाबाद में हुई हालिया हत्याओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने सरकार से कहा कि यदि प्रदेश की कानून व्यवस्था संभालना संभव नहीं है, तो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को इस्तीफा दे देना चाहिए।
अजय राय ने पश्चिम बंगाल में टीएमसी नेता अभिषेक बनर्जी पर हुए कथित हमले पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में हिंसा की कोई जगह नहीं हो सकती और सभी राजनीतिक दलों के नेताओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए। राजनीतिक मतभेद के बावजूद हिंसा नकारात्मक है और इसे हर स्तर पर रोकना आवश्यक है।
इस पूरे घटनाक्रम से स्पष्ट होता है कि सरकारों को जनता की सुरक्षा के प्रति गंभीर कदम उठाने होंगे और भ्रष्टाचार पर एक प्रभावी रोक लगानी होगी। जनता को उम्मीद है कि जिम्मेदार अधिकारी अब अवहेलना छोड़कर अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन करेंगे ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएं न हों।

