नासिक। मुंबई नाका पुलिस स्टेशन में दर्ज बहुचर्चित टीसीएस केस में शनिवार को आरोपियों को न्यायालय में पेश किया गया, जहाँ उन्हें पांच मई तक पुलिस कस्टडी में रखने का आदेश दिया गया। यह मामला शहर में चर्चा का विषय बना हुआ है और इस पर अब तक कई सुनवाई हो चुकी हैं।
इस प्रकरण के चार मुख्य आरोपियों तौसीफ बिलाल अत्तार, दानिश एजाज शेख, शाहरुख हुसैन शौकत कुरैशी एवं रजा रफीक मेमन को पहले भी पुलिस कस्टडी में रखा गया था। शुरूआती तौर पर उन्हें २३ अप्रैल को नासिक रोड सेंट्रल जेल से पुलिस कस्टडी में लिया गया था। तब अदालत ने उनकी कस्टडी अवधि २९ अप्रैल तक तय की थी, जिसे बाद में दो मई तक बढ़ाया गया था। शनिवार को पुनः कोर्ट में पेशी के दौरान पुलिस की ओर से कस्टडी और बढ़ाने की मांग की गई, जिसे अदालत ने मंजूर कर लिया।
सरकारी पक्ष की ओर से सरकारी वकील अजय मिसर ने बताया कि मामले की जांच अभी पूरी नहीं हुई है। अब तक सात पंचनामे किए जा चुके हैं और आरोपियों के मोबाइल जब्त कर लिए गए हैं, पर मामले के कई महत्वपूर्ण पहलू जांच के अधीन हैं। उन्होंने अदालत से अतिरिक्त पांच दिनों की कस्टडी की मांग की ताकि जांच सही ढंग से पूरी की जा सके।
बचाव पक्ष के वकील उमेश वालझाडे समेत अन्य ने पुलिस कस्टडी की मांग का विरोध किया। उनका तर्क था कि यह मामला वर्ष २०२२ का बताया जा रहा है, जबकि केस दर्ज २०२६ में हुआ है, जिससे देरी पर सवाल उठते हैं। उन्होंने कहा कि आरोपियों के खिलाफ पहले कोई लिखित शिकायत नहीं की गई थी और अधिकांश जांच प्रक्रिया पूरी हो चुकी है इसलिए पुलिस कस्टडी की आवश्यकता नहीं है।
बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि आरोपियों को अप्रैल से ही कस्टडी में रखा गया है और जांच एक ही अधिकारी द्वारा की जा रही है। उन्होंने इस बात पर भी सवाल उठाया कि मामले में ‘कन्वर्जन’ और अन्य गंभीर आरोपों के लिए ठोस प्रमाण प्रस्तुत नहीं किए गए हैं।
इस पर सरकारी पक्ष ने अदालत को बताया कि चारों आरोपियों के अलग-अलग अपराध सामने आए हैं और कई महत्वपूर्ण सबूतों की जांच अभी बाकी है। जैसे कि कथित तौर पर इस्तेमाल की गई दवा के स्रोत की पड़ताल और अन्य तकनीकी पहलू जो अभी ठीक से समझे जाने हैं, जिसके लिए पुलिस को कस्टडी की आवश्यकता है। अदालत ने पुलिस को पांच मई तक अतिरिक्त समय दिया है, जिसके बाद आरोपियों को पुनः अदालत में पेश किया जाएगा।
यह मामला इसलिए विशेष ध्यान आकर्षित कर रहा है क्योंकि नासिक में स्थित टीसीएस कार्यालय की महिला कर्मचारियों ने कई पुरुष टीम लीडर्स व अन्य साथियों पर शारीरिक शोषण, अनुचित व्यवहार और शादी का झांसा देकर रेप करने के गंभीर आरोप लगाए हैं। आरोप है कि एक सुनियोजित समूह द्वारा महिला कर्मचारियों को धार्मिक आडम्बरों जैसे बुर्का या हिजाब पहनने, कलमा पढ़ने और नमाज अदा करने के लिए मजबूर किया गया। यह मामला सामाजिक और कानूनी दोनों स्तरों पर व्यापक प्रभाव डाल रहा है।
इस मामले में पुलिस की कस्टडी बढ़ाने के फैसले से अभी आगे की जांच में तेजी आने की उम्मीद है, जिससे शीघ्र ही पूरी सच्चाई सामने आ सकेगी। न्यायालय की निगरानी में चल रही यह जांच दोनों पक्षों के तर्कों को ध्यान में रखकर निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़ाई जा रही है। नासिक की जनता इस केस की सुनवाई पर निगाह बनाए हुए है और न्याय की उम्मीद कर रही है।

