कुट्टी रेवथी की नई तमिल फिल्म, सातवीं सदी की पृष्ठभूमि पर, कान्स में प्रदर्शित

Rashtrabaan

    कवयित्री और फिल्मकार कुट्टी रेवथी ने अपनी पहली फिल्म ‘वांजी’ को कान्स फिल्म फेस्टिवल के मार्केट सेक्शन में पेश किया है। यह फिल्म तमिल साहित्य के प्राचीन ग्रंथ ‘कुंडलकेसी’ की एक पुनर्ख्यात व्याख्या है, जो सातवीं सदी के ऐतिहासिक संदर्भ में स्थापित है।

    कुट्टी रेवथी, जो पहले अपनी कविता और कहानी लेखन के लिए जानी जाती थीं, ने इस फिल्म के माध्यम से तमिल साहित्य के महत्वपूर्ण पहलुओं को आधुनिक सिनेमा के जरिए विश्व के सामने प्रस्तुत किया है। ‘वांजी’ एक साहसिक और संवेदनशील प्रयास है जो पुराने और मौजूदा समाज के बीच पुल बनाने का काम करता है।

    कान्स फिल्म फेस्टिवल के मार्केट सेक्शन में फिल्म का प्रदर्शन इस बात का प्रमाण है कि भारतीय क्षेत्रीय सिनेमा विश्व सिनेप्रेमियों और फिल्म निर्माताओं के बीच तेजी से पहचान बना रहा है। मार्केट सेक्शन एक ऐसा मंच है जहां फिल्मों को वितरण के लिए प्रोत्साहित किया जाता है और वैश्विक फिल्म उद्योग के खरीदार और विक्रेता एक साथ आते हैं।

    ‘वांजी’ के विषयवस्तु में प्राचीन तमिल महिला योद्धा कुंडलकेसी की कहानी है, जिसे एक साहसिक और स्वतंत्र महिला के रूप में प्रस्तुत किया गया है। फिल्म इस कहानी को आधुनिक काल में फिर से जीवित करता है और सामाजिक मुद्दों पर भी ध्यान केंद्रित करता है, जिससे दर्शकों को भावनात्मक और बौद्धिक दोनों स्तरों पर जुड़ाव महसूस होता है।

    फिल्म निर्माता कुट्टी रेवथी ने बताया कि उन्हें इस ऐतिहासिक कथा को सिनेमा के माध्यम से प्रस्तुत करने का विचार तब आया जब उन्होंने कुंडलकेसी की कहानी पढ़ी। उनकी मानना है कि इस तरह की कथाएं आज की युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणादायक और महत्वपूर्ण हैं। फिल्म की कहानी और निर्देशन दोनों ही बेहद सूक्ष्म और प्रभावशाली हैं, जो इसे कान्स जैसे प्रतिष्ठित मंच के लिए उपयुक्त बनाते हैं।

    इस उपलब्धि के साथ, कुट्टी रेवथी ने तमिल सिनेमा में ही नहीं बल्कि पूरे भारतीय सिनेमा में अपनी एक अलग पहचान बनाई है। उनकी यह पहल अन्य फिल्मकारों के लिए भी प्रेरणा स्रोत बनेगी, खासकर उन के लिए जो क्षेत्रीय भाषाओं और सांस्कृतिक विरासत को अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंचाना चाहते हैं।

    अंततः, ‘वांजी’ का कान्स में प्रदर्शन भारतीय सिनेमा की विविधता और सांस्कृतिक समृद्धि को दर्शाता है। यह फिल्म तमिल इतिहास और महिला सशक्तिकरण के महत्वपूर्ण विषय को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करती है और विश्व सिनेप्रेमियों के बीच तमिल साहित्य एवं इतिहास की गहरी समझ पैदा करती है।

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