लखनऊ। ईद-उल-अजहा के पावन पर्व पर समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने महत्वपूर्ण बात कही है। उन्होंने इस त्योहार को भाईचारे और एकता का प्रतीक बताया और इसका संदेश समाज को आगे बढ़ाने के लिए प्रयोजित किया। उन्होंने नमाज के बाद साझा भाव से गले मिलने को एकता की मिसाल बताया।
नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने अविमुक्तेश्वरानंद द्वारा गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की बात पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मुस्लिम समुदाय के कई नेताओं ने पहले ही गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग की है, इसलिए इस विवाद में उलझने की जरूरत नहीं है। उनका कहना था कि इन बयानों का कोई बड़ा राजनीतिक या सामाजिक अर्थ नहीं है और इसे बढ़ाने की आवश्यकता नहीं।
इसी संदर्भ में समाजवादी पार्टी के अन्य नेता रविदास मेहरोत्रा ने कहा कि ईद-उल-अजहा के मौके पर वे पूरे देशवासियों को दिल से मुबारकबाद देते हैं। उन्होंने कहा कि यह हमारे बीच भाईचारा और सांप्रदायिक सौहार्द बढ़ाने का अवसर है और इस पर्व को हम सब मिलकर एकता का प्रतीक बनाएं। रविदास मेहरोत्रा ने अपने संबोधन में कहा कि यदि हिंदू-मुस्लिम एकता के लिए किसी भी प्रकार की कुर्बानी देनी पड़े, तो वे इसके लिए पूरी तरह तैयार हैं।
रविदास मेहरोत्रा ने आगे कहा कि उन्होंने नमाज के बाद दुआ की कि देश में शांति और अमन बना रहे, भीषण गर्मी से लोग राहत पाएं और जनगणना में सभी नागरिक बढ़-चढ़कर हिस्सा लें। उन्होंने भाजपा सरकार पर कटाक्ष करते हुए कहा कि वह जनता के ध्यान को मुख्य मुद्दों से हटा कर अनर्गल विवाद खड़ा करने की कोशिश करती है। उन्होंने शंकराचार्य के धर्मयुद्ध के ऐलान का समर्थन करते हुए कहा कि उनकी पार्टी की मांग है कि गाय को राष्ट्रमाता का दर्जा दिया जाना चाहिए।
मौलाना खालिद राशिद फिरंगी महली ने भी इस अवसर पर कहा कि ईदगाह में बड़ी संख्या में मुसलमान एकत्रित होकर सही माहौल में नमाज अदा की और देश के विकास तथा भीषण गर्मी से मुक्ति के लिए दुआ की। उन्होंने जनगणना में भागीदारी की अपील की और कुर्बानी के दौरान जारी की गई एडवाइजरी का पालन करने का आग्रह किया। मौलाना ने कहा कि त्योहार को सौहार्दपूर्ण और मिलजुल कर मनाया जाना चाहिए तथा केवल उन जानवरों की ही कुर्बानी की जाए जिन पर कोई कानूनी प्रतिबंध न हो।
इस प्रकार, ईद-उल-अजहा पर्व ने न केवल धार्मिक आस्था को मजबूती दी, बल्कि सामाजिक एकता और भाईचारे का संदेश भी दिया। सपा नेताओं की मांग ने गाय को राष्ट्रमाता का दर्जा देने के विचार को फिर से राजनीति की सुर्खियों में ला दिया है। इस दौरान विभिन्न समुदायों ने मिलजुल कर शांति और विकास की कामना की और नए सामाजिक सौहार्द की स्थापना का संकल्प लिया।

