शरीर पर सात चोटों ने बढ़ाई ट्विशा शर्मा मौत मामले की गंभीरता, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के फैसले पर बोले एडवोकेट जनरल प्रशांत सिंह

Rashtrabaan

    जबलपुर। मध्य प्रदेश के महाधिवक्ता (एडवोकेट जनरल) प्रशांत सिंह ने कहा है कि ट्विशा शर्मा की मौत के मामले में हाईकोर्ट ने कई अहम पहलुओं पर गौर किया है। ट्विशा के शरीर पर मृत्यु-पूर्व सात चोटों के निशान पाए गए हैं, जो इस घटना की गंभीरता को दर्शाते हैं। यह बात उन्होंने एक याचिका की सुनवाई के दौरान कही, जिसमें आरोपी सास गिरिबाला सिंह को दी गई अग्रिम जमानत को रद्द करने की मांग शामिल थी।

    एडवोकेट जनरल प्रशांत सिंह ने बताया कि जमानत देने वाले निचली अदालत ने केस डायरी और गवाहों के बयानों की पूरी जांच किए बिना जमानत दे दी थी। उन्होंने कहा कि गिरिबाला सिंह को जांच टीम ने कई बार नोटिस जारी किए थे, लेकिन आरोप है कि उन्होंने जांच में सहयोग नहीं किया। अदालत ने जमानत देते हुए स्पष्ट किया था कि आरोपी सहयोग करेंगी।

    आईएएनएस से बातचीत में प्रशांत सिंह ने बताया कि एफआईआर में दहेज उत्पीड़न और क्रूरता के आरोप दर्ज हैं। ट्विशा के साथ हुई क्रूरता और उनकी अप्राकृतिक मौत, जो छह महीने के भीतर हुई, इस मामले को दहेज हत्या का रूप देती है। उन्होंने कहा कि जांच में शामिल गवाहों के बयान भी आरोपों की पुष्टि करते हैं।

    जांच में मिली वाट्सऐप चैट भी दहेज उत्पीड़न की घटनाओं का समर्थन करती हैं। महाधिवक्ता ने कहा कि यदि इन चैट्स की ठीक से जांच हो, तो और भी स्पष्ट सबूत सामने आ सकते हैं।

    मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने हाल ही में पूर्व जिला न्यायाधीश गिरिबाला सिंह को दी गई अग्रिम जमानत को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने पाया कि निचली अदालत ने केस से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज़ और गवाहों के बयान पर्याप्त रूप से नहीं देखे। जस्टिस देवनारायण मिश्रा ने बताया कि इस मामले की समीक्षा में स्पष्ट हुआ कि निचली अदालत की ओर से जमानत देने में गंभीर भूल हुई है।

    हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि मामले की जांच में अधिकारियों को पूरी स्वतंत्रता और संसाधन मिलना चाहिए ताकि न्याय का सही पालन हो सके। न्यायालय ने अनुरोध किया कि सभी पक्ष उचित सहयोग प्रदान करें ताकि सबूतों की जांच निष्पक्ष तरीके से हो सके।

    ट्विशा शर्मा की मौत ने दहेज उत्पीड़न जैसे सामाजिक मुद्दे पर एक बार फिर ध्यान केंद्रित किया है। इस मामले में न्याय सुनिश्चित करना न केवल पीड़िता के लिए बल्कि समाज के अन्य लोगों के लिए भी अहम है।

    अधिकारियों का कहना है कि इस मामले के तथ्य और सबूतों का गहराई से विश्लेषण किया जाएगा, ताकि कहीं भी कोई पक्षपात न हो और न्यायिक प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी रहे। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के इस फैसले से उम्मीद है कि दहेज उत्पीड़न के मामलों में सख्ती बढ़ेगी और न्यायिक प्रणाली द्वारा पीड़ितों को पर्याप्त संरक्षण मिलेगा।

    यह मामला दहेज हत्या और घरेलू हिंसा के खिलाफ समाज में चेतना बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन सकता है। न्याय व्यवस्था के समक्ष चुनौती है कि वह पीड़िताओं को न्याय दिलाने के साथ-साथ ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति को भी रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए।

    Source

    error: Content is protected !!