मुंबई। महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने गुरुवार को ईंधन की बढ़ती कीमतों को लेकर सरकार की कड़ी आलोचना की। उनका कहना था कि यह समस्या पूरी तरह से सरकार की विफलताओं और नीतिगत लापरवाहियों का परिणाम है।
पत्रकारों से बातचीत में सपकाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘आत्मनिर्भर भारत’ का वादा करते हुए आम जनता को भ्रमित किया, जबकि वास्तविकता में अर्थव्यवस्था की उपेक्षा की गई है। ये परिस्थितियां ईंधन संकट की वजह बनी हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया, “पेट्रोल, डीजल, सीएनजी और एलपीजी गैस की कीमतों में जबर्दस्त वृद्धि सरकार की ठोस नीतियों के अभाव में हुई है। इसके बावजूद प्रधानमंत्री चुनाव प्रचार में व्यस्त रहे, जिसके चलते आम जनता को भारी आर्थिक दबाव झेलना पड़ रहा है।”
सपकाल ने कहा कि 2014 से लेकर अब तक मोदी सरकार ने लगातार ईंधन की कीमतों को बढ़ाते हुए आम आदमी पर बोझ डाला है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी और निजी तेल कंपनियों ने इन बढ़ोतरी से गंभीर लाभ अर्जित किया है। यदि सरकार ने उचित वित्तीय संसाधन सुरक्षित रखे होते तो यह संकट टाला जा सकता था, परन्तु उसने कॉरपोरेट हितों को प्राथमिकता दी जो भ्रष्टाचार का उदाहरण है।
ईंधन और गैस की कमी ने अनेक क्षेत्रों को प्रभावित किया है, जैसे कि होटल, रेस्तरा, छोटे व्यवसाय, और घरों में खाना पकाने तक। उन्होंने कहा कि यह स्थिति सीधे तौर पर अर्थव्यवस्था की जड़ें कमजोर करती है।
प्याज मूल्य संकट पर विचार देते हुए सपकाल ने बताया कि महाराष्ट्र मंत्रिमंडल के आधे सदस्य दिल्ली जाकर केंद्रीय मंत्री अमित शाह से मिले, पर राज्य को कोई खास फायदा नहीं मिला। उन्होंने कहा कि सरकार 1,500 रुपए प्रति क्विंटल की कीमत तय कर रही है, जबकि किसान कम से कम 3,000 रुपए मांग रहे हैं तथा चाहते हैं कि पूरा प्याज स्टॉक एनएएफईडी के माध्यम से खरीदा जाए।
सपकाल ने स्मरण कराया कि प्रधानमंत्री मोदी ने 2014 में नासिक दौरे के दौरान किसानों को 2,400 रुपए प्रति क्विंटल देने का वादा किया था, वहीं मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी ऐसी ही घोषणाएं की थीं, किन्तु अब केवल 1,500 रुपए की दर पर चर्चा हो रही है, जो किसानों के साथ धोखा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार किसानों की मांगें नहीं मानेगी तो कांग्रेस सशक्त विरोध प्रदर्शन करेगी।
उन्होंने भाजपा पर आरोप लगाया कि वह देश में दंगे भड़काने और 2029 में फिर से सत्ता प्राप्त करने की साजिश रच रही है। बकरीद के समय पैदा किया गया माहौल इसी रणनीति का हिस्सा है। भाजपा हर त्योहार को सांप्रदायिक मुद्दों में बदलने की नीयत से काम करती है, जिससे सामाजिक सद्भाव बिगड़ता है। बकरीद के कारण पशुपालक किसानों को करोड़ों रुपए का नुकसान हुआ है, जिसका श्रेय भाजपा की कट्टर राजनीति को दिया जा सकता है।
हर्षवर्धन सपकाल ने निष्कर्ष निकाला कि वर्तमान सरकार की गलत नीतियों ने देश की आम जनता और किसानों को कठिन आर्थिक परिस्थितियों में डाला है। उन्होंने जल्द सुधारात्मक कदम उठाने की मांग की ताकि ईंधन और खाद्य वस्तुओं के मूल्य नियंत्रण में आ सकें और किसानों की दुर्दशा समाप्त हो सके।

