बुरहानपुर। मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले के छोटे से गांव पतोंडा में रहने वाले अभिषेक जायसवाल ने केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (पीएमएफएमई) की मदद से अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत करते हुए आत्मनिर्भरता की मिसाल कायम की है। नौकरी छोड़कर अपने सपने को साकार करने निकले अभिषेक ने इस योजना के तहत प्राप्त लोन की सहायता से एक डिहाइड्रेटेड सब्जियों का यूनिट स्थापित किया, जो आज न सिर्फ उनकी सफलता का प्रतीक है, बल्कि स्थानीय महिलाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी प्रदान कर रहा है।
अभिषेक ने अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद नौकरी करना शुरू किया था, लेकिन उनका मन हमेशा कुछ अपनी मेहनत और प्रयास से करने का था। इसी जज्बे के चलते उन्हें पीएमएफएमई योजना की जानकारी मिली। उन्होंने योजना के तहत आवेदन किया और 19 लाख 94 हजार रुपए का लोन प्राप्त किया, जिसमें सब्सिडी भी शामिल थी। इस वित्तीय सहायता से उन्होंने अपना डिहाइड्रेटेड यूनिट शुरू किया, जहां सब्जियों को डिहाइड्रेट कर पाउडर के रूप में तैयार किया जाता है, जिससे उनके उत्पादों की शेल्फ लाइफ बढ़ जाती है और बाजार में उनकी मांग भी बेहतर होती है।
अभिषेक ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा, “यह हमारा डिहाइड्रेटेड यूनिट है जहां हम सब्जियों को पाउडर में बदलते हैं। कृषि क्षेत्र से जुड़ा होना और लोकल प्रोडक्ट्स को बढ़ावा देना मेरा उद्देश्य है। पीएम मोदी जी की इस योजना के तहत हमें वित्तीय सहायता मिली है, जो युवाओं के लिए एक नई राह खोल रही है।”
उनका स्टार्टअप न केवल उनके लिए फायदे का सौदा साबित हुआ है, बल्कि स्थानीय महिलाओं को रोजगार देकर उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव भी ला रहा है। वर्तमान में इस यूनिट में छह महिलाएं कार्यरत हैं, जिनके माध्यम से परिवारों की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ हो रही है और महिलाओं का सशक्तीकरण भी हो रहा है।
अभिषेक के सहयोगी अजय महाजन ने बताया, “पीएमएफएमई योजना से हमें बड़ी मदद मिली है और हमारा यूनिट सफलता के मार्ग पर है। हम मिलकर इस व्यवसाय को चला रहे हैं, जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार मिल रहा है।”
स्थानीय व्यापारी संदीप रावल ने अभिषेक की तारीफ करते हुए कहा, “अभिषेक ने युवाओं को रोजगार देने और बेरोजगारी को कम करने के लिए एक प्रेरणादायक पहल की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री मोहन यादव युवाओं के लिए जो प्रयास कर रहे हैं, वह सराहनीय है।”
इस प्रकार, केंद्र सरकार की पीएमएफएमई योजना ने अभिषेक की जीवनशैली ही नहीं बदली, बल्कि उन्होंने अपने प्रयासों से ‘विकसित भारत’ की एक जीवंत इबारत लिखी है जो छोटे गांवों के युवाओं के लिए प्रेरणा बन सकती है।

