महाराष्ट्र में पेट्रोल की बढ़ती कीमतों के खिलाफ कांग्रेस का जबरदस्त विरोध प्रदर्शन

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    मुंबई। महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने राज्य में पिछले आठ दिनों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में चार बार हुई बढ़ोतरी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व किया। उन्होंने इस बढ़ती महंगाई को आम जनता के लिए एक गंभीर समस्या बताते हुए सरकार पर कड़ा आरोप लगाया।

    सपकाल ने मीडिया से बातचीत में कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) द्वारा संचालित केंद्र सरकार ने पेट्रोल, डीजल, एलपीजी और सीएनजी की कीमतों में लगातार वृद्धि करके सतही तौर पर जनता की आर्थिक स्थिति को कमजोर कर दिया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार ने लगातार महंगाई की आग लगाकर आम आदमी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं, जिससे लोग जीवन यापन के मूलभूत साधनों के लिए भी संघर्ष कर रहे हैं।

    उन्होंने आगाह किया कि पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतें न केवल परिवहन को महंगा बना रही हैं बल्कि इससे सभी वस्तुओं और सेवाओं के मूल्य बढ़ने का रास्ता खुल रहा है। खासकर किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य न मिल पाने से वे काफी परेशान हैं। सपकाल ने कहा कि भाजपा सरकार अपने दायित्वों से मुंह मोड़कर उल्टे झूठे दावे कर रही है।

    सपकाल ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर आरोप लगाया कि वे जनता को गुमराह कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “अगर पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त स्टॉक है तो फिर लोग दोपहर की तेज गर्मी में पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारों में क्यों लगे हैं? अगर सरकार को लगता है कि जमाखोरी हो रही है, तो वह तत्काल प्रभाव से कठोर कार्रवाई करे।”

    वहीं, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के प्रदेश अध्यक्ष शशिकांत शिंदे ने चेतावनी दी कि किसानों के साथ जारी अन्याय के खिलाफ महाराष्ट्र भर में बड़े पैमाने पर आंदोलन तेज हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि विपक्ष द्वारा किए गए विरोध प्रदर्शनों ने सरकार को स्पष्ट संदेश दिया है कि जनता महंगी महंगाई और किसानों की समस्याओं से परेशान है।

    शिंदे ने कहा, “अगर मुख्यमंत्री हमारे आंदोलनों को राजनीतिक स्टंट कहकर नजरंदाज करते रहेंगे, तो विपक्ष को मजबूर होकर सड़कों पर उतरना पड़ेगा। अब विरोध की भावना पूरे राज्य में तेज हो रही है।” उन्होंने विशेष रूप से महा विकास अघाड़ी द्वारा प्याज के उचित मूल्य और निर्यात नीति में बदलाव की मांग पर जोर दिया।

    राज्य के प्रमुख प्याज उत्पादक क्षेत्रों जैसे चांदवड (नासिक), संभाजीनगर, जुन्नार और ओतुर में धरना, रास्ता जाम और पदयात्रा जैसे बड़े प्रदर्शनों का आयोजन हुआ। इन प्रदर्शनों के दौरान किसानों और पार्टी कार्यकर्ताओं की पुलिस ने कई जगहों पर गिरफ्तारी भी की।

    इन घटनाक्रमों से यह स्पष्ट हो गया है कि महाराष्ट्र के आम नागरिक और किसान दोनों ही बढ़ती महंगाई और असमय नीति के खिलाफ एक स्वर में आवाज उठा रहे हैं। विरोध प्रदर्शन लगातार बढ़ रहे हैं और सरकार के लिए उन्हें नजरअंदाज करना मुश्किल होता जा रहा है।

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