लखनऊ: सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर की संदिग्ध मौत, पति और ससुराल वालों पर दहेज हत्या का मामला

Rashtrabaan

    लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में एक युवा सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत ने इलाके में विवाद की लहर मचा दी है। मृतका के परिजनों ने पति सागर राजपूत और उसके परिवार के खिलाफ दहेज हत्या का आरोप लगाया है, साथ ही यह भी आरोप लगाया है कि उनके द्वारा यह घटना आत्महत्या का रूप देने की कोशिश की गई।

    मृतका मानसी की शादी 2024 में कानपुर की रहने वाली एक पारिवारिक शादी में हुई थी। दोनों दूल्हा और दुल्हन सोशल मीडिया पर सक्रिय थे, लेकिन शादी के बाद से ही दहेज को लेकर समस्याएँ शुरू हो गईं। मानसी के परिवार ने बताया कि शादी के दौरान तो दहेज के नाम पर नकदी, घरेलू सामान और उपहार दिये गए, लेकिन ससुराल की मांगें लगातार बढ़ती गईं। यहां तक कि कार की मांग भी की गई, जिसे पूरा न करने पर मानसी को मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया गया।

    परिवार के अनुसार, मानसी ने कई बार अपनी परेशानी उनसे साझा की थी और वे शांति स्थापित करने के लिए दोनों परिवारों को मिलाने की कोशिश करते रहे। उनके प्रयासों के बावजूद हालात सुधरने के बजाय बदतर होते गए।

    हालांकि शुरुआत में मानसी की मौत को आत्महत्या बताया गया, परंतु उनके परिजनों ने इसे पूरी तरह खारिज करते हुए हत्या की आशंका जताई। उन्होंने पुलिस को लिखित शिकायत देते हुए मानसी के पति, ससुर, देवर, ननद और बुआ के विरुद्ध दहेज हत्या की एफआईआर दर्ज कराने की मांग की। पुलिस ने भी छह आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर मामला गंभीरता से जांचना शुरू कर दिया है। राजपूत परिवार के सदस्यों से पूछताछ जारी है ताकि मौत के पीछे के सच का पता लगाया जा सके।

    राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के अनुसार, भारत में 2024 में दहेज से जुड़े अपराधों में करीब 5,737 मौतें दर्ज हुईं, अर्थात लगभग हर दिन 16 महिलाओं की ऐसी मौत होती है। उत्तर प्रदेश में यह संख्या सबसे अधिक है, जहां 2,038 मामले रिपोर्ट हुए, इसके बाद बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान और पश्चिम बंगाल जैसे राज्य भी इस कड़वी हकीकत से अछूते नहीं हैं।

    यह मामले हमारे समाज में दहेज प्रथा की जटिलता और उससे जुड़े अपराधों की गंभीरता को दर्शाते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, कानून तो पर्याप्त हैं, लेकिन उनकी प्रभावी कार्यवाही और समाज में सोच परिवर्तन बहुत जरूरी है ताकि महिलाओं को इस तरह के खतरों से सुरक्षित रखा जा सके।

    पुलिस ने मामले की उच्च प्राथमिकता देते हुए विस्तृत जांच शुरू कर दी है ताकि न्याय मिल सके और इस दर्दनाक घटना के पीछे छिपे तथ्य उजागर हो सकें। समाज के सदस्यों से भी अपील की गई है कि वे ऐसी महिलाओं के प्रति संवेदनशील हों और किसी भी तरह की उत्पीड़न के खिलाफ आवाज उठाएं। यह घटना एक बार फिर चेतावनी है कि दहेज प्रथा की जड़ें समाज से उखाड़ फेंकने का समय अब आ गया है।

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