‘अपराध साबित होने पर कार्रवाई सुनिश्चित,’ पटना कोचिंग विवाद पर संजय निरुपम का बयान

Rashtrabaan

    मुंबई। संजय निरुपम ने रविवार को स्पष्ट किया कि कोई भी व्यक्ति कानून से ऊपर नहीं है, चाहे वह शिक्षक हो, प्रोफेसर हो, डॉक्टर हो, इंजीनियर हो या वकील। उन्होंने कहा, ‘रौशन आनंद पर आरोप लगे तो उन्हें गिरफ्तार किया गया है। अब खान सर पर आरोप लगने के बाद उन्हें भी कानून के अनुसार गिरफ्तारी देनी होगी। यदि अपराध साबित होता है, तो सजा भी निश्चित होगी।’

    पटना के कोचिंग संस्थान अपने उत्कृष्ट शिक्षण के लिए प्रसिद्ध हैं, जहां खासकर गरीब और प्रतिभाशाली बच्चों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी मुफ्त या कम फीस में कराई जाती है। इसके बावजूद दो प्रमुख कोचिंग संस्थानों के बीच विवाद गहरा गया है, जो समूचे क्षेत्र की शिक्षा व्यवस्था को प्रभावित कर सकता है। एक कोचिंग की अगुवाई फैसल खान (खान सर) कर रहे हैं, जबकि दूसरा संस्थान रौशन आनंद द्वारा संचालित है। कुछ दिनों पहले दोनों पक्षों के बीच हिंसक घटना हुई, जिसमें आरोपी पक्षों ने एक-दूसरे पर गोली चलाने का आरोप लगाया।

    खान सर ने दावा किया कि रौशन आनंद के ज्ञान बिंदु कोचिंग संस्थान से जुड़े कुछ लोगों ने उन पर गोलीबारी की। इस मामले में रौशन आनंद को गिरफ्तार भी किया गया। हालांकि, बाद में पुलिस जांच में इस बात का खुलासा हुआ कि फायरिंग की शुरुआत वास्तव में खान सर के गार्ड्स ने की थी, जिसके बाद उनके खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया। स्थिति ऐसी हो गई है कि अब कानून के अनुसार खान सर को भी गिरफ्तारी देनी होगी, और यदि ऐसा नहीं किया जाता है, तो उनके कोचिंग संस्थान को सील करने का आदेश दिया जा सकता है।

    संजय निरुपम ने कहा, “शिक्षकों का मुख्य कर्तव्य बच्चों को सही दिशा देना होता है, न कि अवैध या हिंसात्मक गतिविधियों में सम्मिलित होना। शिक्षक होने का सम्मान बनाए रखना जरूरी है और इसका दुरुपयोग कोई भी नहीं कर सकता।” उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी प्रकार का अपराध सभी के लिए अप्रिय है और इसे शीघ्रता से खत्म करना आवश्यक है।

    राजनीतिक संदर्भ में, संजय निरुपम ने पश्चिम बंगाल की स्थिति पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी ने तुंरमूल कांग्रेस को कड़ी मेहनत से खड़ा किया और लगभग पंद्रह वर्षों तक राज्य में शासन संभाला, लेकिन हालिया विधानसभा चुनाव में पार्टी को हार का सामना करना पड़ा। इसके कारण पार्टी में आंतरिक असंतोष बढ़ गया और कई विधायकों ने अपनी नाराजगी जताई है। इस स्थिति का असर आगामी राजनीतिक परिस्थितियों पर भी पड़ेगा।

    महाराष्ट्र में जिला स्तर के निकाय चुनावों और विधान परिषद की १७ सीटों को लेकर उन्होंने बताया कि छह सीटों पर निर्विरोध चुनाव हुए, जिनमें महायुति के उम्मीदवार विजयी रहे। इसके विपरीत, विपक्षी गठबंधन, जिसमें कांग्रेस और महा विकास अघाड़ी शामिल हैं, ने अपने कुछ उम्मीदवार वापस ले लिए, जिससे उनकी स्थिति कमजोर हुई। उन्होंने यह भी माना कि कांग्रेस संगठन में कमजोरी का सामना कर रही है, साथ ही उम्मीदवारों के आत्मविश्वास में कमी भी दिखाई दे रही है, जिसके कारण वे चुनावों में लगातार पिछड़ रहे हैं।

    मदरसों के सर्वेक्षण पर बात करते हुए संजय निरुपम ने कहा कि मदरसों की आड़ में अवैध गतिविधियां या घुसपैठ को रोकने के लिए कड़ी जांच और निगरानी आवश्यक है। उनका मानना है कि मदरसों का उद्देश्य केवल शिक्षा प्रदान करना होना चाहिए, और इससे जुड़े संस्थानों की पारदर्शिता सुनिश्चित करने हेतु समय-समय पर कठोर निरीक्षण किया जाना अपेक्षित है। अगर पश्चिम बंगाल सरकार इस दिशा में प्रयास कर रही है, तो यह न केवल राज्य, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के हित में भी है।

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