छत्तीसगढ़ का ऊर्जा आत्मनिर्भरता की ओर ऐतिहासिक कदम

Rashtrabaan

    रायपुर : छत्तीसगढ़ सरकार ने वर्ष 2026 से 2031 के लिए महत्वाकांक्षी ‘द्विप्ति योजना’ को मंजूरी दे दी है, जिसका उद्देश्य नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देना और सतत विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाना है। यह योजना राज्य को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने तथा पर्यावरण संरक्षण के साथ आर्थिक विकास को संतुलित करने की दिशा में एक बड़ी पहल मानी जा रही है।

    ‘द्विप्ति योजना’ के तहत राज्य सरकार पवन, सौर, जल और बायोमास जैसी नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा देने के लिए ठोस रणनीतियाँ तैयार करेगी। इसके साथ ही, इस योजना में ऊर्जा उत्पादन क्षमता बढ़ाने, ऊर्जा संरक्षण और नवाचार को प्रोत्साहित करने के लक्ष्यों को शामिल किया गया है। यह योजना राज्य के ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में ऊर्जा की जरूरतों को पूरा करने और रोजगार सृजन के अवसर प्रदान करने का एक माध्यम भी साबित होगी।

    सरकारी अधिकारियों के अनुसार, इस योजना के अंतर्गत नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाएगी और तकनीकी प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जाएंगे, जिससे स्थानीय युवा इस क्षेत्र में कुशल बन सकें। साथ ही, स्मार्ट ग्रिड तथा ऊर्जा भंडारण प्रणालियों के विकास पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा ताकि बिजली की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित हो सके।

    छत्तीसगढ़ की उर्जा मंत्री ने इस पहल को राज्य के लिए महत्वपूर्ण बताया और कहा कि पर्यावरण हितैषी ऊर्जा के उपयोग से छत्तीसगढ़ न केवल अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए आत्मनिर्भर बनेगा, बल्कि देश के समग्र ऊर्जा लक्ष्यों में भी महत्वपूर्ण योगदान देगा। मंत्री ने जनता से भी सहयोग की अपील करते हुए कहा कि वे ऊर्जा संरक्षण के उपाय अपनाएं और नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने में सक्रिय भूमिका निभाएं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि ‘द्विप्ति योजना’ से छत्तीसगढ़ में स्वच्छ ऊर्जा की मांग बढ़ेगी और हरित ऊर्जा क्षेत्र में निवेश आकर्षित होगा, जिससे आर्थिक विकास को नई गति मिलेगी। साथ ही, यह पहल राज्य की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करते हुए जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने में सहायक सिद्ध होगी।

    इस प्रकार, छत्तीसगढ़ की यह योजना न केवल पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में एक प्रभावशाली कदम है, बल्कि राज्य की सतत विकास यात्रा को भी एक नया आयाम प्रदान करेगी। ग्रामीण तथा शहरी क्षेत्रों के विकास के साथ-साथ यह योजना रोजगार, तकनीकी ज्ञान और निवेश के लिए भी नए द्वार खोलेगी। भविष्य में इसे एक आदर्श मॉडल के रूप में देश के अन्य राज्यों के लिए भी माना जाएगा।

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