अयोध्या। राम मंदिर में चढ़ावे की गणना को लेकर सामने आई कथित अनियमितताओं की जांच अब तेज हो गई है। इसी के चलते मंदिर प्रशासन और बैंक प्रबंधन ने चढ़ावा गिनने वाले कर्मचारियों की कार्यप्रणाली को और भी कड़े नियमों के दायरे में ला दिया है। विशेष जांच दल (SIT) की जांच के बीच कर्मचारियों के लिए एक नये ड्रेस कोड को लागू किया गया है। अब उन सभी कर्मियों को बिना जेब वाली खास वर्दी पहननी अनिवार्य कर दी गई है, ताकि किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या भ्रष्टाचार की संभावना को पूरी तरह खत्म किया जा सके।
चढ़ावा गणना प्रक्रिया में सख्ती
राम मंदिर में प्राप्त दान और चढ़ावे की गिनती की प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाए रखने के लिए कई नए निर्देश जारी किए गए हैं। हाल ही में जांच के दौरान कुछ कार्यकर्ताओं की कार्यशैली पर सवाल उठे, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें कार्यमुक्त भी किया गया। इसके पश्चात बैंक प्रबंधन ने नई टीमों का गठन कर पूरी कार्यप्रणाली पर कड़ी नजर रखी जा रही है। अब सभी कर्मचारियों की विस्तृत जांच के बाद ही उन्हें कार्य करने की अनुमति दी जाती है और वे केवल तयशुदा वर्दी पहनकर ही मंदिर परिसर में प्रवेश कर सकते हैं। इस वर्दी का खास पहलू यह है कि इसमें जेब नहीं हैं, जिससे कोई भी कर्मचारी कोई भी वस्तु छिपा नहीं सकेगा।
अनुबंध व्यवस्था पर उठ रहे सवाल
राम मंदिर भवन निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने हाल ही में एक इंटरव्यू में बैंक प्रबंधन की जवाबदेही पर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा कि बैंक और ट्रस्ट के बीच हुए अनुबंध में स्पष्ट दिशा-निर्देश होने के बावजूद गणना प्रक्रिया में हुई चूक गंभीर है। सादगी और ईमानदारी की कमी से मंदिर की प्रतिष्ठा पर असर पड़ सकता है।
बताया गया है कि चढ़ावा गणना के लिए बैंक ने आउटसोर्सिंग एजेंसी के जरिए कर्मचारियों की व्यवस्था की थी। एजेंसी कर्मचारियों की नियुक्ति, वेतन और अनुशासन की जिम्मेदारी संभालती थी। अब इन व्यवस्थाओं की भी जांच की जा रही है ताकि हर कड़ाई से परखा जा सके।
मोबाइल और मीडिया पर पाबंदी
SIT जांच के दौरान सूचना लीक से बचने के लिए मंदिर प्रशासन ने कर्मचारियों के लिए कड़े प्रतिबंध लगाए हैं। अब मंदिर परिसर में कर्मचारियों के लिए मोबाइल फोन ले जाना पूरी तरह से मना है। इसके अलावा कर्मचारियों को मीडिया से बात करने या कोई बयान देने से भी रोका गया है। यह कदम मंदिर के भीतर सूचना की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।
सूत्र बताते हैं कि प्रशासन सतर्क हो गया है क्योंकि कई संवेदनशील जानकारियां बाहर आ चुकी हैं। कर्मचारी और उनके परिवार भी सार्वजनिक रूप से किसी विषय पर टिप्पणी करने से बच रहे हैं।
कर्मचारियों में चिंता और प्रशासन की प्रतिक्रिया
जांच बढ़ने के साथ ही कर्मचारियों के बीच चिंता और अनिश्चितता का माहौल व्याप्त है। वे उम्मीद कर रहे हैं कि उनकी परीक्षा निष्पक्ष तरीके से होगी, लेकिन इस प्रक्रिया को लेकर वे सतर्क भी हैं। अधिकांश कर्मचारी सार्वजनिक रूप से कोई बयान नहीं दे रहे हैं ताकि अतिरिक्त विवाद से बचा जा सके।
मंदिर प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि श्रद्धालुओं का विश्वास सबसे महत्वपूर्ण है और इसी उद्देश्य के तहत चढ़ावा गणना की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और जवाबदेह बनाया जा रहा है। मंदिर के नाम की गरिमा बनाए रखना प्रशासन की प्राथमिकता है और इसके लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।

