लखनऊ के अलीगंज स्थित कोचिंग सेंटर में लगी भीषण आग ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया है। इस दुखद हादसे में अब तक 15 बच्चों की मौत हो चुकी है और कई अन्य बच्चे गंभीर रूप से घायल होकर किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) के ट्रामा सेंटर में भर्ती हैं। इस घातक अग्निकांड से प्रभावित परिवारों के लिए राहत कार्य चल रहा है, वहीं मीडिया और व्यवस्थित प्रयासों के माध्यम से नए तथ्य सामने आ रहे हैं।
केजीएमयू की वाइस चांसलर प्रोफेसर सोनिया नित्यानंद ने मीडिया से बातचीत में कहा कि वे घटना की हर पल की जानकारी रखती हैं और अस्पताल में सभी घायलों के बचाव के लिए पूरी टीम जुटी हुई है। उन्होंने कहा, “जिस स्तर तक बचाना संभव है, हम वही करेंगे। मृतकों का पोस्टमार्टम हमारा अगला कार्य है। घायलों का इलाज प्राथमिकता पर है।”
डॉक्टर प्रेम राज सिंह ने बताया कि अभी तक 15 बच्चों को मृत लाया गया था, जबकि आठ बच्चे घायलों में हैं, जिनकी हालत स्थिर बनी हुई है। एक बच्चा जो ऊपरी मंजिल से कूद गया था, उसकी रीढ़ की हड्डी में फ्रैक्चर का संदेह है और दूसरा बच्चा जो लड़की है, उसके पैर में चोट आई है। अस्पताल ने दम घुटने से मौतों की पुष्टि की है।
केजीएमयू के प्रवक्ता के.के. सिंह ने बताया कि अब तक पांच बच्चों को उनकी चोटें कम गंभीर होने के कारण छुट्टी दे दी गई है। दो बच्चे जिनमें ज्यादा गंभीर चोटें हैं, अभी भी इलाजाधीन हैं। उनमें से एक लड़की लवप्रीत के बाएं जांघ में चोट आई है, पर उसके एक्स-रे में फ्रैक्चर नहीं पाया गया। उसके परिवार के सदस्य दिल्ली से आ रहे हैं। दूसरे घायल बच्चे जयंत की कहानी अधिक दिल दहलाने वाली है। जयंत ने ऊपर से छलांग लगाई, और वह एक लोहे की रॉड पर गिरा जिससे उसकी रीढ़ की हड्डी को गंभीर चोट लगी। उसने अपने शरीर के निचले हिस्से की संवेदनाहीनता महसूस कर रहा है। डॉक्टर्स उसकी मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी की स्थिति जानने के लिए एमआरआई कराना चाहते हैं ताकि अगला उपचार सुनिश्चित किया जा सके।
आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर का दौरा कर पीड़ितों से मुलाकात की। उन्होंने घटना को बेहद दुःखद बताया और कहा कि यह हादसा एक बड़ी त्रासदी है। उन्होंने मृतकों की आत्मा की शांति और परिवारों को धैर्य की कामना की। संजय सिंह ने फायर ब्रिगेड की राहत कार्यों में देरी पर चिंता जताई और जांच चाहिए कि फायर ब्रिगेड क्यों समय पर नहीं पहुंच पाई।
अलीगंज अग्निकांड की यह दुखद घटना पूरे प्रदेश में चिंतन और कार्रवाई की मांग करती है ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदियों को टाला जा सके। प्रशासन से अपेक्षा की जा रही है कि वे फायर सेफ्टी व्यवस्था और आपातकालीन प्रतिक्रिया को और मजबूत करें। इस बीच घायलों के तेज और सही उपचार पर पूरा ध्यान दिया जा रहा है ताकि उन्हें जल्द से जल्द स्वस्थ किया जा सके।

