नई दिल्ली: दिल्ली हाई कोर्ट ने यमुना नदी के बाढ़ क्षेत्र में बने अवैध निर्माणों को हटाने के लिए कड़ा आदेश दिया है, जिसके बाद दिल्ली-एनसीआर में नदी के किनारों पर चल रही अवैध निर्माण गतिविधियों को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। यह आदेश न केवल दिल्ली के लिए बल्कि नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद जैसे पड़ोसी इलाकों के लिए भी लागू होगा। अधिकारियों के अनुसार यमुना और हिंडन नदी के डूब क्षेत्र में बने हजारों अवैध मकानों और अन्य निर्माणों की जांच की जा रही है और जल्द ही उनके विरुद्ध कार्रवाई शुरू होगी।
गाजियाबाद में अवैध निर्माणों की सूची का निर्माण
गाजियाबाद प्रशासन ने यमुना और हिंडन नदियों के डूब क्षेत्र में बने मकानों और कॉलोनियों का सर्वेक्षण शुरू कर दिया है। कई गांवों जैसे कनावनी, करहेड़ा, सिहानी, नूरनगर, मेवला अगरी, असालतपुर और अन्य में लंबे समय से निर्माण हो रहे हैं, जिनसे नदी के प्राकृतिक जल क्षेत्र पर असर पड़ा है। स्थानीय अधिकारियों ने बताया कि अवैध निर्माणों के कारण नदियों के जलप्रवाह में बाधा आती है, जिससे बाढ़ का खतरा बढ़ता है।
डूब क्षेत्र में रह रहे हजारों निवासी
गाजियाबाद के कई इलाकों में हजारों लोग वर्षों से डूब क्षेत्र में रह रहे हैं। कनावनी क्षेत्र इसका उदाहरण है, जहां लोग भूमि खरीद कर मकान निर्माण कर चुके हैं। स्थानीय निवासियों को अब इस कार्रवाई के चलते चिंता सताने लगी है। पर्यावरणविद कहते हैं कि नदी के प्राकृतिक बाढ़ क्षेत्र में निर्माण जुर्माना योग्य है और इससे बाढ़ के समय जनहानि का खतरा कई गुणा बढ़ जाता है।
ग्रेटर नोएडा में 50 से अधिक गांवों की समीक्षा
ग्रेटर नोएडा के सदर और दादरी तहसीलों के करीब 50 गांवों के डूब क्षेत्र में हुए अवैध निर्माणों की गहन जांच की जा रही है। प्रशासन ने होटल, हॉस्टल, दुकानों और प्लॉटिंग गतिविधियों की जानकारी इकट्ठी की है, जो नदी किनारे गैरकानूनी हैं। इन सभी मामलों का विस्तृत सत्यापन किया जाएगा और नियमों के उल्लंघन पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
नोएडा में फार्महाउस संधिग्ध गतिविधि के दायरे में
नोएडा के यमुना तट पर बने फार्महाउसों पर प्रशासन की विशेष नज़र है। सर्वेक्षण में कई ऐसे फार्महाउस मिले हैं जो बाढ़ क्षेत्र के अंदर बने हैं। ऐसी स्थिति में नियमों के तहत इन फार्महाउसों को हटाने या दंडित करने की कार्रवाई संभव है। प्रशासन अभी तक कोई औपचारिक कदम नहीं उठा पाया है, पर लगातार रिपोर्टों की समीक्षा में लगा हुआ है। वहीं फार्महाउसों के व्यावसायिक उपयोग की भी जांच जारी है।
व्यावसायिक उपयोग की जांच और कानूनी कार्रवाई
कुछ फार्महाउस निजी आवास के अलावा आयोजनों और व्यावसायिक गतिविधियों के लिए उपयोग किए जा रहे हैं। इस मामले में स्थानीय निकाय, विकास प्राधिकरण तथा राजस्व विभागों से जानकारी मांगी जा रही है ताकि यदि भूमि उपयोग नियमों का उल्लंघन पाया गया तो कानूनी कार्रवाई की जा सके। प्रशासन पूरी सतर्कता के साथ इस जांच में जुटा है।
बाढ़ जोखिम को लेकर विशेषज्ञों की चेतावनी
प्रशासनिक कार्रवाई पर सभी की निगाहें
दिल्ली हाई कोर्ट के निर्देश के बाद एनसीआर के विभिन्न जिलों में नदी तटों पर बने अवैध निर्माणों की समीक्षा तेजी से हो रही है। प्रशासन दस्तावेजों, नक्शों और भूमि उपयोग के रिकॉर्ड की पड़ताल कर रहा है। नजदीकी भविष्य में कार्रवाई के दायरे में आने वाले निर्माण स्पष्ट हो जाएंगे। प्रशासन, सिंचाई विभाग और अन्य संबंधित एजेंसियां डूब क्षेत्रों में बने निर्माणों का निश्चित आकलन कर रही हैं, जबकि आम जनता भी इस फैसले पर नजर बनाए हुए है।

