मुंबई, राष्ट्रबाण। देशभर में चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के बीच चुनाव आयोग ने मतदाताओं को बड़ी राहत देने का फैसला किया है। मतदाता सूची से हटाए गए ऐसे लोगों को एक और मौका दिया जाएगा, जो अनुपस्थित, दूसरे स्थान पर पलायन कर चुके, मृत या डुप्लीकेट मतदाता के रूप में चिह्नित किए गए थे। ऐसे मतदाता अब अपनी पात्रता साबित कर दोबारा मतदाता सूची में नाम शामिल कराने की प्रक्रिया पूरी कर सकेंगे। दरअसल, एसआईआर अभियान के दौरान चुनाव आयोग की ओर से मतदाताओं को गणना फॉर्म उपलब्ध कराए गए थे। निर्धारित समय में कई लोगों ने ये फॉर्म जमा नहीं किए। इसके बाद उन्हें अनुपस्थित, पलायन कर चुके, मृत और डुप्लीकेट जैसी श्रेणियों में चिह्नित किया गया और उनके नाम प्रारूप मतदाता सूची से हटा दिए गए। अब आयोग ने ऐसे लोगों को अपनी पात्रता साबित करने का एक और अवसर देने के निर्देश दिए हैं।
सात राज्यों और केंद्र शासित क्षेत्रों में लागू होंगे निर्देश
चुनाव आयोग के ये निर्देश दिल्ली, महाराष्ट्र, हरियाणा, आंध्र प्रदेश, झारखंड, तेलंगाना और नागालैंड में लागू होंगे। आयोग ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि ऐसे मतदाताओं के मामलों पर विशेष ध्यान दिया जाए। साथ ही पात्र नागरिकों को मतदाता सूची में अपना नाम दोबारा शामिल कराने के लिए पर्याप्त अवसर दिया जाए।
डुप्लीकेट नामों को लेकर भी सख्ती
चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि किसी भी व्यक्ति का नाम मतदाता सूची में एक से अधिक बार दर्ज नहीं होना चाहिए। इसलिए हटाए गए नामों को दोबारा शामिल करने की प्रक्रिया के दौरान डुप्लीकेट पंजीकरण की जांच सावधानी से करने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों को निगरानी व्यवस्था बनाने के लिए भी कहा गया है, ताकि पात्र मतदाताओं के नाम अंतिम सूची में शामिल हो सकें और सूची में किसी तरह की गड़बड़ी न रहे।
पात्र मतदाताओं को मिलेगी राहत
चुनाव आयोग के इस फैसले से उन लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है, जिनके नाम गणना फॉर्म जमा नहीं होने या अन्य कारणों से प्रारूप मतदाता सूची से हटा दिए गए थे। हालांकि, नाम दोबारा जुड़वाने के लिए संबंधित लोगों को अपनी पात्रता साबित करनी होगी और निर्धारित प्रक्रिया पूरी करनी होगी। आयोग का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाना है। इसके साथ ही यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि कोई भी पात्र नागरिक मतदाता सूची से बाहर न रहे और उसे अपने लोकतांत्रिक अधिकार यानी मतदान करने का अवसर मिल सके।


