प्रयागराज। उत्तर प्रदेश सरकार को त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव टालने की कोशिश पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि ग्राम पंचायतों के कार्यकाल समाप्त होने के बाद ग्राम प्रधानों को प्रशासक के रूप में नियुक्त करना असंवैधानिक है। अदालत ने राज्य सरकार को 13 जुलाई तक पंचायत चुनाव कराने की विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत करने का आदेश दिया है। साथ ही पंचायत राज विभाग के प्रमुख सचिव को हलफनामा दाखिल करने के निर्देश भी दिए हैं।
न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की एकल पीठ ने सहारनपुर निवासी अरविंद राठौर की याचिका पर सुनवाई के दौरान यह भी सवाल उठाया कि जब संबंधित प्रावधान असंवैधानिक घोषित हो चुके हैं तो ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाकर कार्य क्यों जारी रखा जा रहा है। सरकारी पक्ष से इस विषय में स्पष्टीकरण मांगा गया।
राज्य चुनाव आयोग का बयान: चुनाव की तैयारी पूरी
सुनवाई के दौरान राज्य चुनाव आयोग ने अदालत को बताया कि 10 जून 2026 को मतदाता सूची प्रकाशित हो चुकी है और चुनाव कराने के लिए आयोग पूरी तरह तैयार है। हालांकि, आयोग ने यह भी कहा कि सरकार की ओर से आवश्यक प्रशासनिक व्यवस्था न मिलने के कारण चुनाव प्रक्रिया ठप पड़ी हुई है।
सरकार ने पेश किया ओबीसी आरक्षण का कारण
सरकार ने यह भी बताया कि पंचायत चुनावों में ओबीसी आरक्षण निर्धारित करने के लिए पिछड़ा वर्ग आयोग जिलावार सर्वेक्षण कर रहा है। आयोग की रिपोर्ट मिलने के बाद ही आरक्षण की अंतिम रूपरेखा बनेगी। इस प्रक्रिया में देरी के कारण चुनाव टालना पड़ रहा है।
प्रमुख सचिव से मांगा गया विस्तृत जवाब
हाईकोर्ट ने पंचायत राज विभाग के प्रमुख सचिव को आदेश दिया है कि वे यह स्पष्ट करें कि किस कानूनी आधार पर ग्राम प्रधानों को कार्यकाल समाप्त होने के बाद भी प्रशासकीय जिम्मेदारी दी गई। अदालत ने चेतावनी दी कि संतोषजनक जवाब न मिलने पर संबंधित अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होना पड़ सकता है और अवमानना की कार्रवाई भी हो सकती है।
संविधान के अनुच्छेदों का हवाला देते हुए कोर्ट की अहम टिप्पणी
अदालत ने संविधान के अनुच्छेद 243-ई और 243-के का हवाला देते हुए कहा कि पंचायतों के कार्यकाल को पांच वर्ष से अधिक नहीं बढ़ाया जा सकता। समय पर चुनाव कराना सरकार का संवैधानिक दायित्व है। कोर्ट ने यह भी याद दिलाया कि पिछले फैसलों में ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाने वाले प्रावधान को असंवैधानिक करार दिया जा चुका है।
ग्राम पंचायतों का कार्यकाल 26 मई को समाप्त हुआ था
प्रदेश की 57,694 ग्राम पंचायतों का कार्यकाल 26 मई 2026 को समाप्त हो चुका है। इस पर सरकार ने 25 और 26 मई के आदेश जारी कर मौजूदा ग्राम प्रधानों को छह माह तक प्रशासक के रूप में सीमित अधिकारों के साथ कार्य करने की अनुमति दी थी। इस अवधि में उन्हें केवल आवश्यक विकास कार्य ही करने की छूट थी, जबकि सभी महत्वपूर्ण निर्णय के लिए जिलाधिकारी की मंजूरी अनिवार्य की गई थी।

