नई दिल्ली, राष्ट्रबाण। देश की पहली मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना तेजी से आगे बढ़ रही है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत समुद्र के नीचे सुरंग बनाने का काम जारी है। नवी मुंबई के सावली से विक्रोली के बीच समुद्र तल से करीब 114 मीटर नीचे सुरंग का निर्माण किया जा रहा है। लगभग 35 मंजिला इमारत के बराबर गहराई पर बन रही इस सुरंग के निर्माण कार्य में करीब 1,200 मजदूर और इंजीनियर जुटे हुए हैं। परियोजना के तहत समुद्र के भीतर करीब सात किलोमीटर लंबी सुरंग बनाई जा रही है। इसके निर्माण के लिए चीन से लाई गई लगभग 3,000 टन वजनी टनल बोरिंग मशीन (टीबीएम) का इस्तेमाल किया जा रहा है। यह मशीन मार्च में परियोजना स्थल पर पहुंची थी। वहीं, सावली से शीलफाटा के बीच 4.8 किलोमीटर लंबी सुरंग का निर्माण पहले ही पूरा किया जा चुका है। समुद्री सुरंग परियोजना का अब तक करीब 10 प्रतिशत काम पूरा होने की जानकारी दी गई है।

एक ही सुरंग में दोनों दिशाओं में चलेंगी ट्रेनें
इस समुद्री सुरंग की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें एक ही चौड़ी सुरंग के भीतर दोनों दिशाओं में बुलेट ट्रेनें संचालित की जाएंगी। योजना के मुताबिक समुद्र के नीचे ट्रेन की गति 180 से 280 किलोमीटर प्रति घंटा रहेगी, जबकि अन्य हिस्सों में बुलेट ट्रेन अधिकतम 320 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से दौड़ सकेगी।
पानी का दबाव और गीली मिट्टी बड़ी चुनौती
समुद्र के नीचे सुरंग का निर्माण करना इंजीनियरों के लिए बड़ी चुनौती है। यहां पानी का अत्यधिक दबाव और गीली मिट्टी जैसी समस्याओं से निपटना पड़ रहा है। इसके लिए स्लरी बेस्ड मिक्स शील्ड टीबीएम तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। सुरंग को मजबूत और सुरक्षित बनाने के लिए कंक्रीट रिंग सेगमेंट लगाए जा रहे हैं। साथ ही पानी के रिसाव को रोकने के लिए विशेष वाटरप्रूफ सीलिंग की व्यवस्था की जा रही है। समुद्री सुरंग का निर्माण करीब 30 महीने में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
स्वदेशी बुलेट ट्रेन का भी हुआ निरीक्षण
इसी बीच रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने हाल ही में बेंगलुरु स्थित बीईएमएल प्लांट में स्वदेशी बुलेट ट्रेन बी-28 का निरीक्षण किया। इस ट्रेन का अगस्त 2027 से ट्रायल शुरू होने की संभावना जताई गई है। समुद्र के नीचे सुरंग निर्माण और स्वदेशी बुलेट ट्रेन की तैयारी को देश की हाई-स्पीड रेल परियोजना की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।


