लखनऊ। राजधानी लखनऊ के अलीगंज क्षेत्र में एक कोचिंग सेंटर में लगी भीषण आग ने वहां के जीवन को हिला कर रख दिया। इस दर्दनाक अग्निकांड की सूचना मिलते ही रक्षामंत्री और लखनऊ के सांसद राजनाथ सिंह ने अपने सभी पूर्व निर्धारित कार्यक्रम स्थगित कर रात के समय सीधे लखनऊ पहुंचकर घटना स्थल का निरीक्षण किया।
रक्षा मंत्री ने यह हादसा अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण बताया और मृतकों के परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने आश्वासन दिया कि दोषियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी और उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी। राजनाथ सिंह ने अधिकारियों से राहत एवं बचाव कार्यों की पूरी जानकारी हासिल की तथा प्रशासन को हर संभव सहायता प्रदान करने के निर्देश दिए।
इस गंभीर घटना के बाद रक्षामंत्री सीधे किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) पहुंचे, जहां भर्ती घायलों से मिले और चिकित्सकों से उनका उपचार कैसे हो रहा है, यह जाना। उन्होंने सभी घायलों को सर्वोत्तम चिकित्सा सुविधाएँ मुहैया कराने को प्राथमिकता देने की बात कही और घायल परिवारों को आवश्यक सहायता का भरोसा दिलाया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, अलीगंज के पुरनिया इलाके में स्थित एक एनिमेशन और कोचिंग सेंटर में लगी आग के कारण पूरी इमारत धुएं से भर गई। अग्नि से बचने के लिए कई छात्रों ने इमारत की ऊंचाई से छलांग लगा दी, जिससे कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। इस घटना ने पूरे क्षेत्र को सन्न कर दिया है।
घटना की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन कर घटना की गहन जांच कराने का आदेश दिया है। इस जांच दल का नेतृत्व प्रमुख सचिव अमृत अभिजात और एडीजी लखनऊ जोन प्रवीण कुमार कर रहे हैं। साथ ही दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश भी मुख्यमंत्री ने दिए हैं।
इसके अतिरिक्त मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिजनों को पांच-पांच लाख रुपये और घायल छात्रों को 50-50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री स्वयं अलीगढ़ दौरे को बीच में छोड़कर लखनऊ लौट आए और घटना स्थल व केजीएमयू में जाकर स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने कहा कि दोषियों को किसी भी हालत में बख्शा नहीं जाएगा। सरकार हर हाल में पीड़ित परिवारों के साथ खड़ी रहेगी।
हादसे के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी दुख प्रकट किया है और इस त्रासदी पर संवेदना जताई है। इस बीच डीजीपी राजीव कृष्ण, अपर मुख्य सचिव (गृह) संजय प्रसाद, डीजी फायर सर्विस सुजीत पांडेय समेत अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौके पर मौजूद रहकर राहत और बचाव कार्यों की निगरानी कर रहे हैं।
यह अग्निकांड एक बार फिर से आग से जुड़ी सुरक्षा के नियमों की अनदेखी एवं इमारतों में बचाव इंतजामों की कमी को उजागर करता है। वर्तमान में प्रशासन पीड़ितों को उचित सहायता दे रहा है और समय रहते दोषियों को कड़ी सजा दिलाने का संकल्प लिया गया है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके और लोगों की जान सुरक्षित रह सके।

