नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह व भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से अलग-अलग महत्वपूर्ण बैठकों में हिस्सा लिया। इन बैठकों के बाद प्रदेश में विभागों के बंटवारे और संगठनात्मक फेरबदल को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है। सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री ने अमित शाह के आवास पर करीब एक घंटे तक विचार-विमर्श किया, जिसमें हाल ही में हुए मंत्रिमंडल विस्तार के बाद विभागों के आवंटन, सरकार एवं संगठन के बीच बेहतर तालमेल, और आगामी 2027 विधानसभा चुनाव की रणनीति पर विस्तार से चर्चा हुई। अपनी मुलाकातों का एक हिस्सा उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पुष्पगुच्छ प्रस्तुत करते हुए भी साझा किया।
विभागों के बंटवारे पर सियासी निगाहें
10 मई को हुए मंत्रिमंडल विस्तार में प्रदेश के 60 मंत्री पद पूरा किए गए, लेकिन नए मंत्रियों को अभी तक विभाग आवंटित नहीं किया गया है। इससे राजनीतिक गलियारों में विभागों की बंटवारे को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। विशेष रूप से लोक निर्माण विभाग (PWD) को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है, क्योंकि यह विभाग उत्तर प्रदेश सरकार का एक महत्वपूर्ण और संवेदनशील विभाग माना जाता है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि विभागों का बंटवारा सिर्फ प्रशासनिक आधार पर नहीं होगा, बल्कि सामाजिक, क्षेत्रीय एवं जातीय समीकरणों को भी ध्यान में रखा जाएगा। भाजपा मिशन-2027 को ध्यान में रखते हुए संतुलित राजनीतिक संदेश और सामाजिक समरसता को कायम रखने के लिए रणनीति बन रही है।
नितिन नवीन से भी हुई रणनीतिक बातचीत
अमित शाह से बैठक के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से भी मुलाकात की। पार्टी सूत्रों के अनुसार, यह बैठक केवल शिष्टाचार भेंट नहीं थी, बल्कि प्रदेश भाजपा संगठन में संभावित बदलाव और नई टीम गठित करने पर भी विस्तृत चर्चा हुई। पार्टी आगामी चुनावों को सशक्त बनाने के उद्देश्य से संगठनात्मक फेरबदल और नए पदों पर विचार कर रही है।
नए मंत्रियों को मिल सकती हैं महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां
हाल में मंत्रिमंडल विस्तार में जिन छह नए चेहरों को स्थान मिला है, उनमें तीन ओबीसी और दो दलित वर्ग के नेता हैं। इस विस्तार में भाजपा ने सामाजिक समावेशन को प्राथमिकता दी है। संभावना जताई जा रही है कि नए मंत्रियों को केवल प्रतीकात्मक विभाग नहीं, बल्कि महत्वपूर्ण और प्रभावशाली विभाग भी सौंपे जा सकते हैं ताकि पार्टी का सामाजिक संदेश प्रभावी ढंग से पहुंच सके।
पुराने मंत्रियों के विभागों में भी हो सकता है बदलाव
मंत्रिमंडल विस्तार के बाद कोई पुराने मंत्री हटाए नहीं गए, लेकिन कई पुराने मंत्रियों के विभागों में फेरबदल भी हो सकता है। कुछ विभागों की समीक्षा के बाद प्रभावी और कुशल प्रदर्शन करने वाले मंत्रियों को बड़े और महत्वपूर्ण विभाग सौंपे जाने की संभावना है। सरकार का मानना है कि इससे विभागों का संचालन बेहतर होगा और जनकल्याणकारी योजनाओं को मजबूती मिलेगी।
लोक निर्माण विभाग पर खास नजर
लोक निर्माण विभाग को लेकर सबसे ज्यादा राजनीतिक हलचल देखी जा रही है। वर्ष 2022 के बाद से यह विभाग मुख्यमंत्री योगी के अधीन रहा है, क्योंकि इसके पहले मंत्री जितिन प्रसाद के केंद्र सरकार में मंत्री बनने के बाद से यह विभाग मुख्यमंत्री के पास चला गया था। अब चर्चा है कि प्रदेश भाजपा अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी या उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य को यह जिम्मेदारी दी जा सकती है। इस विभाग की अहमियत को देखते हुए लखनऊ और दिल्ली दोनों जगह सक्रिय राजनीतिक बातचीत हो रही है। इसके साथ ही भाजपा में हाल ही में शामिल हुए समाजवादी पार्टी से आए मनोज पांडेय को भी कैबिनेट मंत्री बना कर राजनीतिक समीकरण बदले जा रहे हैं।
अब राजनीति की दृष्टि से यह देखना दिलचस्प होगा कि विभागों के बंटवारे के बाद योगी सरकार कौन सा राजनीतिक संदेश प्रदेश और पूरे देश को देती है और यह किस तरह से आगामी विधानसभा चुनावों की रणनीति को प्रभावित करता है।

